Chhattisgarh

सीएसआर साझेदारी से पोषण और बाल विकास योजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार

उद्योगों के सहयोग से आंगनबाड़ी उन्नयन, कुपोषण उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण पर बनेगी दीर्घकालिक कार्ययोजना

रायपुर, 24 जुलाई। राज्य में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं समग्र विकास को नई गति देने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत उद्योगों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में शुक्रवार को सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों की राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सीएसआर सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का सर्वांगीण विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने उद्योग जगत से विभाग के साथ दीर्घकालिक सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि सीएसआर के माध्यम से पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, महिला सशक्तिकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि “आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे।”

महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण तथा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों पर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सीएसआर सहयोग से आंगनबाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री, डिजिटल संसाधन, स्वच्छ पेयजल, खेल सामग्री, स्वच्छता सुविधाएं तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का विस्तार किया जा सकेगा।

बैठक में विभाग की संभावित सीएसआर परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इसमें कुपोषण उन्मूलन, आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन, पोषण वाटिका एवं मुनगा पौधारोपण, प्रारंभिक बाल विकास गतिविधियां, दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव रखा गया।

उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभाग के प्रस्तावों का स्वागत करते हुए विभिन्न योजनाओं में सहयोग की इच्छा जताई और अपने सुझाव भी साझा किए। बैठक में निर्णय लिया गया कि विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी तथा चरणबद्ध तरीके से सीएसआर परियोजनाओं को लागू किया जाएगा।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सीएसआर सहयोग केवल भवन निर्माण या अधोसंरचना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, डिजिटल सशक्तिकरण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए विभाग उद्योगों के साथ नियमित संवाद और समीक्षा की प्रभावी व्यवस्था विकसित करेगा।

विभाग ने बताया कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा विकसित ‘पंखुड़ी’ पोर्टल तथा राज्य शासन के ‘स्टेट सीएसआर पोर्टल’ के माध्यम से विभागीय प्राथमिकताओं और सीएसआर परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है, जिससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी।

Related Articles

Back to top button