शक्कर की बढ़ती कीमतों से त्योहार की मिठास फीकी : माकपा

कोरबा। शक्कर की कीमतों में हुई वृद्धि को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। माकपा के जिला सचिव प्रशांत झा ने आरोप लगाया है कि सरकार की एथेनॉल नीति का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है और त्योहारों के समय शक्कर महंगी होने से लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
प्रशांत झा ने कहा कि जब एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर वाहनों की माइलेज कम होने और अन्य तकनीकी समस्याओं की शिकायतें सामने आ रही थीं, तब भी केंद्र सरकार ने एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति जारी रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आम जनता की समस्याओं की अपेक्षा तेल कंपनियों और एथेनॉल उत्पादकों के हितों को प्राथमिकता दी।
माकपा नेता ने दावा किया कि करीब 25 लाख टन गन्ने को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़े जाने का असर शक्कर की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि राखी जैसे त्योहार के समय शक्कर की कीमतों में वृद्धि से आम परिवारों का बजट प्रभावित हुआ है। माकपा ने सरकार से शक्कर की कीमतों में अचानक हुई वृद्धि का स्पष्ट कारण बताने की मांग की है।
पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा शक्कर आयात करने की बात की जा रही है, लेकिन इसके साथ गन्ने से एथेनॉल उत्पादन पर रोक लगाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। माकपा का कहना है कि आयात की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद शक्कर की उपलब्धता में सुधार आने में समय लग सकता है, जिसका असर आगामी त्योहारों पर भी पड़ सकता है।
माकपा द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चीनी सीजन 2025-26 में 31 मार्च 2026 तक देश में करीब 272.31 लाख टन शक्कर का उत्पादन हुआ था, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में उत्पादन लगभग 248.78 लाख टन था। पार्टी के अनुसार, सीजन की शुरुआत में करीब 47 लाख टन का शुरुआती स्टॉक भी उपलब्ध था। शुरुआती स्टॉक और उत्पादन को मिलाकर मार्च 2026 तक देश में शक्कर की कुल उपलब्धता करीब 319 से 326 लाख टन के बीच रही। माकपा ने इन आंकड़ों के आधार पर कहा है कि देश में शक्कर की वास्तविक कमी नहीं है।
प्रशांत झा ने कहा कि सरकार को शक्कर की कीमतों को तत्काल पूर्व स्तर पर लाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि आम लोगों पर बढ़ती महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े और त्योहारों की मिठास प्रभावित न हो।




