पत्नी की गला घोंटकर हत्या कर आकस्मिक मौत बताने वाले पति को आजीवन कारावास

कोरबा। पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद मौत को आकस्मिक बताने वाले पति को न्यायालय ने आजीवन सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायालय, कटघोरा की न्यायाधीश ममता तिवारी ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद आरोपी महेंद्र दिवाकर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) एवं 238 के तहत दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई।
मामला हरदीबाजार थाना क्षेत्र का है। थाना हरदीबाजार में अपराध क्रमांक 207/2024 दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार आरोपी महेंद्र दिवाकर ने 16 अगस्त 2024 को सुबह करीब 9 बजे से दोपहर 1.30 बजे के बीच अपनी पत्नी ममता दिवाकर की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने घटना को छिपाने और पत्नी की मौत को आकस्मिक बताने का प्रयास किया।
प्रकरण की विवेचना के दौरान आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर घटना से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। आरोपी ने बताया कि उसने पत्नी का गला दबाया तथा मुंह को भी दबाकर रखा था। इसके बाद शव को कमरे में ऐसी स्थिति में रखा गया, जिससे घटना को सामान्य अथवा आकस्मिक मृत्यु का रूप दिया जा सके। अभियोजन ने न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ गवाहों के बयान प्रस्तुत किए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना हरदीबाजार के विवेचना अधिकारी निरीक्षक मृत्युंजय पाण्डेय द्वारा विस्तृत विवेचना की गई। 28 अगस्त 2024 को गवाहों, फोटोग्राफर एवं वीडियोग्राफर की उपस्थिति में आरोपी महेंद्र दिवाकर से घटना के संबंध में सीन री-क्रिएशन कराया गया। सभी तथ्यों एवं साक्ष्यों को संकलित कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन की ओर से पीएमकर्ता डॉ. दीपक प्रकाश ने अपनी रिपोर्ट में मृत्यु को हत्या की प्रकृति का बताते हुए अभिमत दिया था। उनके अनुसार मृतका की मृत्यु दम घुटने (smothering) के कारण हुई थी। अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह भी साबित किया कि मृतका की हत्या गला दबाकर की गई थी।
न्यायालय ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी महेंद्र दिवाकर को दोषी पाया। इसके पश्चात 21 अगस्त 2026 को न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) एवं 238 के अपराध में आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित करने का फैसला सुनाया।




