Chhattisgarh

बेमेतरा के नवागढ़ में जुगाड़ के सहारे अंतिम संस्कार, 11 महीने बाद भी हाईकोर्ट के निर्देशों का जमीनी असर नहीं

बेमेतरा/नवागढ़, 27 सितम्बर। बेमेतरा जिले के नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र में मुक्तिधाम की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सामने आई है। ग्राम खमरिया में शनिवार सुबह मृतक राजेश पाल का अंतिम संस्कार टीन-टप्पर के जुगाड़ से तैयार किए गए अस्थायी शेड के नीचे करना पड़ा। मुक्तिधाम की यह तस्वीर क्षेत्र में अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। कुछ दिन पहले ग्राम सेमरिया से भी इसी तरह की तस्वीर सामने आई थी।

ग्राम खमरिया में अंतिम संस्कार के दौरान बारिश और मौसम की स्थिति से बचाव के लिए ग्रामीणों को टीन-टप्पर लगाकर अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार गरिमापूर्ण तरीके से करना चाहिए, वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। लगातार सामने आ रही ऐसी तस्वीरों से साफ है कि मुक्तिधामों की स्थिति सुधारने के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर बना हुआ है।

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मुक्तिधामों की बदहाल स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी मामला पहुंच चुका है। 29 सितंबर 2025 को तत्कालीन चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा बिल्हा के पास एक न्यायिक अधिकारी के पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे थे। मौके पर मुक्तिधाम की स्थिति देखने के बाद उन्होंने मामले का संज्ञान लिया और जनहित याचिका दर्ज की गई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि 6 अक्टूबर 2025 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा 8 अक्टूबर 2025 को नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से मुक्तिधामों के लिए गाइडलाइन जारी की गई है।

इन दिशा-निर्देशों में मुक्तिधामों में साफ-सफाई, ग्रीन फेंसिंग, शेड की मरम्मत, बिजली-पानी की सुविधा, महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग वाशरूम तथा बैठने के लिए प्रतीक्षालय जैसी व्यवस्थाओं को जरूरी बताया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान डिविजन बेंच ने टिप्पणी की थी कि गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार संविधान के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है और केवल दिशा-निर्देश जारी कर देने से व्यवस्था पूरी नहीं होती, बल्कि उनका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन भी जरूरी है।

हाईकोर्ट की कार्यवाही और दिशा-निर्देशों के करीब 11 महीने बाद नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खमरिया में सामने आई तस्वीरें यह सवाल खड़ा करती हैं कि संबंधित गाइडलाइन का धरातल पर कितना पालन हुआ है। अगर अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों को टीन-टप्पर का सहारा लेना पड़ रहा है, तो यह स्थानीय स्तर पर मुक्तिधाम की सुविधाओं की स्थिति को दर्शाता है।

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15 साल पुरानी स्वीकृति के बावजूद नहीं बना मुक्तिधाम

ग्राम खमरिया के जनपद सदस्य सनत धर दीवान ने बताया कि करीब 15 वर्ष पहले गांव में मुक्तिधाम निर्माण की स्वीकृति मिली थी, लेकिन तत्कालीन सरपंच के कार्यकाल में इसका निर्माण नहीं हो सका। अब ग्राम पंचायत के माध्यम से जी-राम-जी योजना में मुक्तिधाम निर्माण का प्रस्ताव भेजकर प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि योजना के माध्यम से निर्माण स्वीकृत नहीं होता है, तो वे अपनी निधि से मुक्तिधाम का निर्माण कराने का प्रयास करेंगे।

खमरिया और सेमरिया जैसे गांवों से सामने आ रही तस्वीरों के बाद अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुक्तिधामों की मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रशासन गंभीरता से कार्रवाई करेगा और अंतिम संस्कार के लिए लोगों को जुगाड़ के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।

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