कोरबा में उल्लास महापरीक्षा में दिखा सीखने का जज्बा, 383 केंद्रों पर करीब 98% परीक्षार्थियों ने दी परीक्षा

कोरबा। जिले को पूर्ण साक्षर बनाने की दिशा में चल रहे उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 27 सितंबर को उल्लास महापरीक्षा का आयोजन किया गया। जिले के 383 उल्लास केंद्रों में आयोजित परीक्षा में 7,817 परीक्षार्थी निर्धारित थे, जिनमें से लगभग 98 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। परीक्षा केंद्रों पर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में सीखने को लेकर उत्साह देखने को मिला।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन में आयोजित इस महापरीक्षा का उद्देश्य जिले में निरक्षर वयस्कों को साक्षरता से जोड़कर उन्हें पढ़ने-लिखने और दैनिक जीवन की आवश्यक गणनाओं में सक्षम बनाना है। परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर पारिवारिक रिश्तों की सहभागिता भी देखने को मिली। कहीं मां अपने बच्चे के साथ परीक्षा देने पहुंची तो कहीं पति-पत्नी और देवरानी-जेठानी ने साथ बैठकर अपनी सीखने की उपलब्धि को परखा।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड की प्राथमिक शाला समेलीभाठा में विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की 22 वर्षीय संतोषी बाई अपने बच्चे को गोद में लेकर परीक्षा देने पहुंचीं। वहीं प्राथमिक शाला पोड़ी पंडोपारा में 32 वर्षीय मंगली पंडो ने परीक्षा दी। इसी केंद्र में 29 वर्षीय मनीता पंडो ने अपने पति राजा राम पंडो के साथ परीक्षा में हिस्सा लिया।
उल्लास महापरीक्षा में उम्र भी सीखने के उत्साह के सामने बाधा नहीं बनी। करीब 90 वर्षीय घुरवा सिंह ने परीक्षा में शामिल होकर साक्षरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। पाली विकासखंड के संकुल हरदीबाजार अंतर्गत प्राथमिक शाला न्यौसा में करीब 78 वर्षीय जगोती बाई परीक्षार्थी के रूप में शामिल हुईं। वहीं प्राथमिक शाला टेढ़ीकुआं में 46 वर्षीय दिव्यांग परीक्षार्थी घासी राम ने परीक्षा दी।
कोरबा विकासखंड की शासकीय प्राथमिक शाला रोकबहरी में 47 वर्षीय जेठानी बूंद कुंवर और 42 वर्षीय देवरानी मोहरबाई ने एक साथ परीक्षा दी। इससे परीक्षा केंद्रों पर पारिवारिक सहयोग और सामूहिक रूप से सीखने का माहौल नजर आया। कटघोरा उपजेल में बंदियों ने भी उल्लास महापरीक्षा में भाग लिया।
परीक्षा के दौरान साक्षरता विभाग की परियोजना अधिकारी ज्योति शर्मा ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। परीक्षा से पहले कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों और नागरिकों से परीक्षार्थियों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने में सहयोग करने की अपील की थी।
कलेक्टर ने साक्षरता को व्यक्ति, परिवार और समाज के सशक्तिकरण का आधार बताया था। उल्लास महापरीक्षा में बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और परिवार के सदस्यों की भागीदारी ने “साक्षर कोरबा-समृद्ध कोरबा” के संकल्प को नई ऊर्जा दी।




