Chhattisgarh

प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में गूंजा कोरबा का जल संरक्षण मॉडल, ‘कैच द रेन’ अभियान की देशभर में सराहना

कोरबा। जल संरक्षण के क्षेत्र में कोरबा नगर निगम की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में कोरबा नगर पालिक निगम द्वारा संचालित ‘कैच द रेन’ अभियान और वर्षा जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए इसकी सराहना की। प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा के जल संरक्षण मॉडल की प्रशंसा किए जाने से जिला प्रशासन, नगर निगम और जिलेवासियों में उत्साह का माहौल है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में कोरबा में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से कई स्थायी और नवाचारी पहल की गई हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर भूजल स्तर में सुधार करना और भविष्य के जल संकट से निपटने की मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।

एसएएम-2.0 योजना के तहत शहर के 10 अलग-अलग स्थानों पर आधुनिक तकनीक से रिचार्ज वेल बनाए गए हैं। इनका निर्माण नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (इसरो) के तकनीकी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में इंजेक्ट वेल पद्धति से किया गया है। इन रिचार्ज वेल के माध्यम से बारिश का पानी सीधे जमीन के भीतर पहुंचाया जा रहा है, जिससे सड़कों और नालियों में बहने वाले पानी का अपव्यय रुक रहा है और भूजल स्तर में लगातार सुधार हो रहा है।

नगर निगम ने जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए शहर के शासकीय भवनों में 757 और निजी भवनों में 971 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनवाए हैं। इस तरह अब तक कुल 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा भवन निर्माण अनुमति जारी करते समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य शर्त बनाया गया है।

नगर निगम ने सामुदायिक भवनों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, मंगल भवनों और अन्य सार्वजनिक भवनों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था अनिवार्य कर दी है। वर्तमान में 109 निर्माण कार्यों के लिए जारी कार्यादेशों में भी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

भूजल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने शहर के 95 अनुपयोगी और क्षतिग्रस्त बोरवेलों का चिन्हांकन किया है। इन बोरवेलों को री-ड्रिलिंग कर रिचार्ज संरचनाओं के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है, ताकि बेकार पड़े संसाधनों का उपयोग जल संरक्षण के लिए किया जा सके।

जल संरक्षण के साथ-साथ जिले में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। वन विभाग द्वारा कोरबा और कटघोरा वनमंडल में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। इस वर्ष कोरबा वनमंडल में ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट का निर्माण भी किया जा रहा है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर जिले में 15 सितंबर तक ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में नगर निगम ने 18 जुलाई को ‘रन फॉर ग्रीन कोरबा’ कार्यक्रम आयोजित कर जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ पौधरोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वहीं बीबी-राम-जी अभियान के तहत शासकीय कार्यालयों में पौधों का वितरण कर अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी, नवाचार और दूरदृष्टि के साथ किए गए प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणादायी बन सकते हैं। कोरबा नगर निगम का यह मॉडल अब देश के अन्य नगरीय निकायों के लिए भी उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत और नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों, संस्थानों और प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित कर वर्षा जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं। साथ ही अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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