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Puri Rath Yatra 2026: सज-धज कर सिंहद्वार पहुंचे तीनों दिव्य रथ, श्रीमंदिर प्रशासन ने जारी किया महाप्रभु का नीति-निर्धारित समय

Puri Rath Yatra 2026: विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा (घोषयात्रा) के लिए पावन तीर्थ क्षेत्र पुरी पूरी तरह से जगन्नाथमय हो चुका है। रथ, पथ और भक्त सभी महाप्रभु की एक झलक पाने के लिए तैयार हैं। सिंहद्वार से लेकर बड़ादांड तक लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ से पुरी उद्वेलित हो उठी है। इसी बीच श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से रथयात्रा के मुख्य दिन के लिए विस्तृत नीति-निर्धारित समय जारी कर दिया गया है।

रथयात्रा 2026 की समय-सारणी

प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कल सुबह से ही महाप्रभु की विशेष अनुष्ठानिक नीतियां शुरू हो जाएंगी।
मंगल आरती एवं अन्य सुबह की नीतियां: तड़के सुबह से शुरू होंगी।
पहंडी बिजे: सुबह 9:30 बजे शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक संपन्न होगी। इस दौरान जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ तीनों भाई-बहन को धाड़ी पहंडी में रथों पर विराजमान कराया जाएगा।
छेरा पंहरा: दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे के बीच पुरी के गजपति महाराज दिव्य रथों पर सोने की झाड़ू से छेरा पंहरा की रस्म पूरी करेंगे।
रथ खींचना: शाम 4:00 बजे से श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ रथों को खींचना शुरू करेंगे।

सिंहद्वार पहुंचे तीनों भव्य रथ
श्रीमंदिर से आज्ञामाल (दैवीय अनुमति) मिलने के बाद महाप्रभु के तीनों भव्य रथ सिंहद्वार के सामने पहुंच चुके हैं। स्थापित परंपरा के अनुसार, पालिया पूजापंडा सामंत ने श्रीमंदिर के तीनों बाड़ों से आज्ञामाल लाकर पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे घंटा, छतरी और काहली की गूंज के साथ रथखिला (जहां रथ निर्माण हुआ था) पहुंचे।

नियम के मुताबिक, सबसे पहले भगवान बलभद्र के ‘तालध्वज’ रथ को आज्ञामाल प्रदान किया गया। इसके बाद महाप्रभु जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’ और अंत में देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ (पद्मध्वज) रथ को आज्ञामाल दिया गया। इसके तुरंत बाद तालध्वज रथ पर विजय काहली बजाई गई और पुलिस कर्मियों, सेवायतों व भक्तों के सहयोग से तीनों रथों को खींचकर श्रीमंदिर के मुख्य सिंहद्वार के सम्मुख लाकर खड़ा कर दिया गया है। अब बस भक्तों को उस अलौकिक पल का इंतजार है जब गर्भगृह से निकलकर चतुर्धा मूरत जन-जन को दर्शन देने रथों पर सवार होंगे।

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