Chhattisgarh

60 की उम्र के बाद भी नहीं रुकी ज्ञान की यात्रा, सतीश शुक्ला को ज्योतिष में पीएचडी की उपाधि

कोरबा, 27 सितंबर। उम्र को जीवन की यात्रा में बाधा न मानते हुए निरंतर सीखते रहने और स्वयं को नई दिशा देने की प्रेरणादायी मिसाल सतीश शुक्ला ने पेश की है। 60 वर्ष की आयु पार करने के बाद भी अध्ययन और शोध के प्रति उनकी रुचि जारी रही और इसी का परिणाम है कि उन्हें ज्योतिष विषय में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। 27 सितंबर 2026 को उदयपुर में आयोजित दीक्षांत एवं उपाधि समारोह में महर्षि कॉलेज ऑफ वैदिक एस्ट्रोलॉजी द्वारा उन्हें ज्योतिष विषय में डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।

सतीश शुक्ला की यह उपलब्धि उनके पिता प्रयाग नारायण शुक्ला की जीवन-दृष्टि से भी जुड़ी हुई है। प्रयाग नारायण शुक्ला भारतीय पुलिस सेवा के विशिष्ट अधिकारी रहे। सेवाकाल के दौरान उन्होंने कर्तव्य और कर्मठता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने स्वयं को निष्क्रिय नहीं किया। 60 वर्ष की आयु में भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने नियमित छात्र के रूप में एलएलबी में प्रवेश लिया और कानून की पढ़ाई शुरू की। उनका मानना था कि व्यक्ति जब तक सक्रिय है, तब तक वह परिवार और समाज के लिए उपयोगी बना रह सकता है। वे अक्सर कहा करते थे कि “वकील कभी रिटायर नहीं होता।”

पिता की इसी सोच को उनके छोटे पुत्र सतीश शुक्ला ने भी आगे बढ़ाया। उन्होंने 60 वर्ष की आयु पार करने के बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), दिल्ली से ज्योतिष विषय में एमए की शिक्षा प्राप्त की और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। इसके बाद उन्होंने महर्षि कॉलेज ऑफ वैदिक एस्ट्रोलॉजी, उदयपुर से ज्योतिष के क्षेत्र में शोध कार्य प्रारंभ किया।

उनका शोध विषय “ज्योतिषीय आधारों एवं सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में शनि ग्रह की साढ़ेसाती एवं अढ़ैया का मानव जीवन पर प्रभाव का विश्लेषणात्मक अध्ययन” था। शोध कार्य उन्होंने अपनी शोध-निर्देशिका डॉ. आरती कपूर के मार्गदर्शन में पूर्ण किया।

पिता ने सेवानिवृत्ति के बाद कानून को नई दिशा बनाया, तो पुत्र ने ज्योतिष को अपनी ज्ञान-यात्रा का माध्यम चुना। दोनों की जीवन-यात्रा यह संदेश देती है कि उम्र किसी नए लक्ष्य की शुरुआत में बाधा नहीं है। सतीश शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत शैक्षणिक सफलता है, बल्कि निरंतर सीखने, सक्रिय रहने और जीवन में नई पहचान बनाने की प्रेरणादायी मिसाल भी है।

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