Chhattisgarh

घर-घर आंगन तक पहुंचा पानी, आसान हो गई जिंदगानी… विष्णु भैया की डबल इंजन सरकार का जल विकास मॉडल

रायपुर। बड़ी सड़कों, ऊंची इमारतों और नए उद्योगों के अलावा छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार में जल को लेकर विकास का सार्थक स्वरूप सामने आया है। जल जीवन मिशन आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन को आसान बना रहा है। सरल जन-जीवन की तस्वीर में बुनियादी रूप से ग्रामीण महिलाओं को पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, बच्चे पानी की कतार में खड़े होने के बजाय स्कूल जा पाते हैं और हर परिवार के आंगन में नल खोलते ही स्वच्छ पानी पहुंचता है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जन-जन के विष्णु भैया के नेतृत्व में प्रदेश में सफ़ल होता जल जीवन मिशन इसी बदलाव की कहानी लिख रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार केंद्र की इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। केंद्र और राज्य के बीच समन्वय से जल जीवन मिशन को गति मिलना डबल इंजन सरकार की उस कार्यशैली को प्रदर्शित करता है जिसमें राष्ट्रीय संसाधनों और राज्य की स्थानीय जरूरतों को जोड़ने का सफ़ल प्रयास किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशानिर्देश पर 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की शुरुआत हुई थी। इस मिशन का लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पाइप से पेयजल उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय स्तर पर जल जीवन मिशन की शुरुआत के समय लगभग 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों के पास नल कनेक्शन था। जुलाई 2026 तक यह संख्या लगभग 15.89 करोड़ पहुंच गई, यानी 82 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल जल पहुंचने की सूचना है।

मिशन का लक्ष्य केवल पाइप बिछाना नहीं है। निर्धारित सेवा मानक के अनुसार प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। जल जीवन मिशन 2.0 के साथ अब जोर केवल कनेक्शन देने से आगे बढ़कर नियमित, सुरक्षित और टिकाऊ जल सेवा पर है।

केंद्र के सहयोग से मिल रही छत्तीसगढ़ को गति

डबल इंजन सरकार की चर्चा तब ही सार्थक होती है जब केंद्र की नीतियों और संसाधनों का राज्य स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन दिखाई दे। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन इसका एक जीवंत उदाहरण है।

मार्च 2026 में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ ने केंद्र के साथ सुधार-आधारित समझौता किया। इसके बाद वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को 536.53 करोड़ रुपए जारी किए। अगस्त 2026 में केंद्र ने 2026-27 के दौरान छत्तीसगढ़ के लिए 149.50 करोड़ रुपए की केंद्रीय हिस्सेदारी की प्रतिपूर्ति भी जारी की। इससे स्पष्ट होता है कि मिशन अब केवल निर्माण के साथ रखरखाव, सेवा की निरंतरता, डिजिटल निगरानी और जवाबदेही पर भी केंद्रित है।

विष्णु भैय्या के नेतृत्व में गांवों तक पहुंचता पानी

छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर के मान से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में भी रनिंग वाटर की व्यवस्था जल जीवन मिशन को घरेलू सुविधा के साथ सामाजिक आधारभूत संरचना से जोड़ रही है। प्रदेश में नल का पानी केवल घर की रसोई तक नहीं पहुंच रहा बल्कि बच्चों के स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी तक स्वच्छता और सुविधा का विस्तार कर रहा है।

रायगढ़ से बारीउमराव तक दिख रहा महा बदलाव

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले को घरेलू नल कनेक्शन देने में उल्लेखनीय प्रगति वाले जिलों में स्थान मिला है। राज्य सरकार की कार्ययोजनाओं के तहत सिंगल विलेज स्कीम और मल्टी विलेज स्कीम सहित बहुत सी पेयजल योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड का ग्राम बारीउमराव इस बदलाव की प्रामाणिक तस्वीर सामने रखता है। यहां घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने के बाद ग्रामीण परिवारों को पानी के लिए दूर स्थित हैंडपंपों पर निर्भरता कम हुई है। अब घर के आंगन में जल जीवन मिशन का नल पहुंचने से बहुत सी ऊर्जा और समय खेती-किसानी, रोजगार, पढ़ाई और घरेलू कामों में लगाया जा सकता है।

ग्राम बारीउमराव के निवासी करम दास के अनुभव में इस बदलाव को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है वे कहते हैं अब पानी के लिए न दूर जाना पड़ता है और न लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है। उनका यह कहना किसी आंकड़े से ज़्यादा महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यह ऐसा बदलाव है जिसे ग्रामीण परिवार अपने दैनिक जीवन में महसूस करते हैं।

महिलाओं के समय और श्रम की हो रही बचत

जल जीवन मिशन का सर्वाधिक सामाजिक प्रभाव महिलाओं के जीवन में दिखाई दे रहा है क्योंकि पानी लाने का दायित्व लंबे समय से ग्रामीण परिवारों में महिलाओं पर अधिक रहा है। जल जीवन मिशन से घर तक नल पहुंचने से उनका समय और श्रम बचता है। जल भरण से बचा हुआ समय अब वे परिवार, बच्चों की पढ़ाई, खेती, स्वरोजगार और अन्य गतिविधियों में लगा रही हैं। जल जीवन मिशन एक पेयजल योजना होने के साथ ही महिला सुविधा और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है।

कनेक्शन से आगे बढ़कर है निरंतर सेवा का लक्ष्य

जल जीवन मिशन 2.0 में छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने सेवा वितरण को केंद्र में रखा है। केंद्र ने मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाते हुए कुल 8.69 लाख करोड़ रुपए के परिव्यय को मंजूरी दी है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता शामिल है। डिजिटल निगरानी, ग्राम पंचायतों की भूमिका, परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग, जल स्रोतों की स्थिरता, ग्राम पंचायतों की भूमिका और योजनाओं के रखरखाव पर बढ़ता जोर इस बात की पुष्टि है कि भविष्य में सफलता की कसौटी यह नहीं होगी कि कितने नल लगाए गए बल्कि यह होगी कि कितने घरों तक नियमित और गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंच रहा है।

समूचे राज्य तक जल जीवन मिशन की पहुंच एक बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ ने जल जीवन मिशन में उल्लेखनीय प्रगति की है। छत्तीसगढ़ गैसें बड़े और भौगोलिक रूप से विविधता वाले राज्य में हर घर तक नियमित और गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाना निरंतर प्रयास से ही सम्भव है। नई पाइपलाइन के साथ पुराने ढांचे का रखरखाव, जल स्रोतों की सुरक्षा, पानी की गुणवत्ता और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

रायपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शेष कार्यों को पूरा कर 31 दिसंबर 2026 तक शत-प्रतिशत ‘हर घर जल’ जिला बनाने का लक्ष्य इसी निरंतर प्रयास का हिस्सा है।

विकास, जिसे गांव महसूस करता है

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में केंद्र की योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के साथ जोड़ने का स्पष्ट प्रयास दिखाई देता है। जल जीवन मिशन में केंद्र से मिलने वाली वित्तीय और तकनीकी सहायता और राज्य सरकार की क्रियान्वयन क्षमता ने मिलकर ग्रामीण परिवारों तक सुविधा पहुंचाने का एक मज़बूत आधार तैयार किया है।

जन-जन के ‘विष्णु भैय्या’ के नेतृत्व में यदि हर गांव के हर परिवार के घर तक नियमित, सुरक्षित और पर्याप्त पानी पहुंचता है, तो यह एक सरकारी योजना से बढ़कर उस विकास की तस्वीर भी होगी जिसमें सरकार की प्राथमिकता सीधे परिवार के आँगन तक दिखाई देती है। आखिरकार विकास, सुविधा का ही दूसरा नाम है।

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