सिंहस्थ कुंभ के विकास के लिए CM मोहन यादव ने खुद तुड़वाया अपना पुश्तैनी घर, बोले- कर्तव्य की वेदी पर खुद को तैयार रखना होगा

उज्जैन। सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों के लिए उज्जैन में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री मोहन यादव के पुश्तैनी मकान का एक हिस्सा भी रास्ते की जद में आ रहा है। रविवार को इस हिस्से को तोड़ा जाएगा। कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने पैतृक घर पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने घर से जुड़ी बचपन और राजनीतिक जीवन की यादों को साझा किया और कहा कि शहर और समाज के हित में जरूरी हो तो जनप्रतिनिधियों को स्वयं उदाहरण पेश करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपने पुश्तैनी घर का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 1982 में साइंस कॉलेज से उन्होंने अपना पहला चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने जॉइंट सेक्रेटरी, प्रेसिडेंट से लेकर विधायक तक के चुनाव लड़े और उनके राजनीतिक सफर का यह इलाका और घर गवाह रहा है। उन्होंने कहा कि घर से भावनात्मक लगाव होना स्वाभाविक है, लेकिन यदि समाज के हित में किसी बदलाव की जरूरत है तो हमें उसके लिए तैयार रहना चाहिए।
मोहन यादव ने कहा कि हर व्यक्ति का अपने घर से भावनात्मक रिश्ता होता है। यही वह जगह होती है, जहां इंसान जन्म लेता है, बचपन बिताता है और अपनी जवानी के महत्वपूर्ण दौर से गुजरता है। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने मेहनत से यह मकान बनाया था और जब उन्होंने दुनिया को देखना भी शुरू नहीं किया था, तब से यह घर परिवार का हिस्सा रहा है। इसलिए इससे लगाव होना स्वाभाविक है, लेकिन समाज के लिए जरूरी होने पर पीछे हटना भी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन की आबादी करीब 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ के दौरान देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में शहर में आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और किसी को परेशानी न हो, इसके लिए विकास कार्य जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैनवासी जिस तरह स्वेच्छा से अपने मकानों और देवस्थलों को पीछे हटाने में सहयोग कर रहे हैं, वह पूरे शहर के लिए सकारात्मक संदेश है।
मोहन यादव ने कहा कि वे भी उज्जैनवासियों के साथ इस प्रक्रिया में शामिल हैं और अपने घर के लिए किसी तरह का मुआवजा नहीं लेंगे। उन्होंने इसे अपनी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास तभी मजबूत होता है, जब विकास कार्यों में बिना भेदभाव के सभी लोग सहयोग करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में लोगों ने स्वेच्छा से अपने आशियाने और देवस्थल पीछे किए हैं। उन्होंने अपनी पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्य में बड़े फैसले लिए जा रहे हैं और सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन के लिए व्यापक स्तर पर विकास कार्य किए जा रहे हैं।
अपने पुश्तैनी घर से भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए भावुक क्षण है, लेकिन कर्तव्य की वेदी पर व्यक्ति को खुद को ऐसे निर्णयों के लिए दृढ़ता से तैयार रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि उज्जैन की ‘अवंतिका’ की आतिथ्य परंपरा सदियों से रही है और सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए शहर के लोगों का योगदान महत्वपूर्ण है।




