पन्ना में बिना मुआवजे ढहा दिए आशियाने! जलमग्न गांवों के बीच ग्रामीणों का सत्याग्रह जारी, बैंक खातों में पैसे आने तक डटे

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित मझगाय बांध परियोजना के जलभराव क्षेत्र में रेड अलर्ट और मूसलाधार बारिश के बीच ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। बिना मुआवजा और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था किए बांध में पानी भरे जाने से मड़लिया, टपरियां और कुंवरपुर समेत कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। घरों में पानी भरने से अनाज और गृहस्थी पूरी तरह तबाह हो गई है, जिसके विरोध में ‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले अमित भटनागर के नेतृत्व में ग्रामीणों का ‘चिता आंदोलन’ और जल-सत्याग्रह 15वें दिन भी जारी रहा।
16 दिनों से पानी में खड़े रहने से पैरों में पड़े घाव
पानी में डूबे आशियाने और रोती-बिलखती महिलाएं प्रशासनिक संवेदनहीनता की पोल खोल रही हैं। लगातार 15 दिनों से दूषित पानी में खड़े होकर प्रदर्शन करने के कारण कई आंदोलनकारियों के पैरों में घाव हो गए हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पनप रही हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि जब तक उनके बैंक खातों में पूरा मुआवजा नहीं आ जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे।

‘भूमि अर्जन अधिनियम 2013’ की उड़ीं धज्जियां
प्रभावित ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित मुआवजा दिए जेसीबी चलाकर उनके घर ढहा दिए। नियमानुसार ‘भूमि अर्जन एवं पुनर्वास अधिनियम 2013’ के तहत जलभराव से पहले विस्थापितों का पुनर्वास और मुआवजा भुगतान अनिवार्य होता है। लेकिन 8 साल बीत जाने के बाद भी कई विस्थापित परिवारों को तय राशि नहीं मिली है, जिससे मजबूर होकर उन्हें उफनते पानी के बीच आंदोलन की राह चुननी पड़ी।




