सुशासन तिहार कैंप में बुजुर्ग दादा की गुहार: “नाती-नातिन को मिल जाए निशुल्क शिक्षा”

कोरबा, 11 मई 2026। चिलचिलाती धूप और तेज गर्मी के बीच सोमवार को इंदिरा स्टेडियम, परिवहन नगर में आयोजित सुशासन तिहार 2026 शिविर में एक मार्मिक तस्वीर देखने को मिली। वार्ड क्रमांक 19 पथरीपारा निवासी जीवराखन विश्वकर्मा (60 वर्ष) अपने 8 वर्षीय नाती उमाशंकर विश्वकर्मा और 7 वर्षीय नातिन सृष्टि विश्वकर्मा को साथ लेकर शिविर पहुंचे और शासन से दोनों बच्चों की निशुल्क शिक्षा की गुहार लगाई।

बुजुर्ग जीवराखन विश्वकर्मा ने शिविर में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि करीब पांच वर्ष पहले उनके पुत्र का निधन हो गया था। पुत्र की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रही थीं, लेकिन एक सप्ताह पूर्व उनकी भी मौत हो गई। लगातार हुए इन पारिवारिक हादसों के बाद अब दोनों मासूम बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह उन पर आ गई है।
उन्होंने बताया कि बढ़ती उम्र और आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा पाना उनके लिए संभव नहीं है। इसी उम्मीद के साथ वे सुशासन तिहार शिविर पहुंचे हैं कि शासन उनकी मदद करेगा और दोनों बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
शिविर में मौजूद लोगों ने भी बुजुर्ग की व्यथा सुनकर संवेदना व्यक्त की। कई लोगों की आंखें नम हो गईं। जीवराखन विश्वकर्मा बार-बार यही कहते नजर आए कि वे चाहते हैं कि उनके नाती-नातिन पढ़-लिखकर आगे बढ़ें और जीवन में कुछ अच्छा करें।
इस दौरान छत्तीसगढ़ शासन के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने बुजुर्ग से आवेदन प्राप्त कर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार जरूरतमंद और गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा, “सुशासन तिहार का उद्देश्य ही आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना है। जीवराखन विश्वकर्मा की स्थिति बेहद संवेदनशील है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित विभाग को उचित पहल करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन स्तर पर जो भी संभव सहायता होगी, वह प्रदान की जाएगी।”
अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सुशासन तिहार शिविर में दिए गए आवेदन पर शासन-प्रशासन कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और दोनों बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।



