Chhattisgarh

फिल्म देखने को लेकर हुए विवाद में पत्नी की हत्या, साक्ष्य मिटाने को कमरे में लगाई आग; पति को उम्रकैद

कोरबा। फिल्म देखने जाने की बात पर हुए विवाद के बाद पत्नी की हत्या कर साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से कमरे में आग लगाने वाले आरोपी पति अभिनेक कुमार लदेर को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार नंदे की अदालत ने आरोपी को हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के अपराध में दोषसिद्ध पाया। मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक एवं लोक अभियोजक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने प्रभावी पैरवी की।

अभियोजन के अनुसार, 22 जुलाई 2025 को आरोपी अभिनेक कुमार लदेर ने थाना सिविल लाइन रामपुर में सूचना दी थी कि उसकी पत्नी सुषमा खुसरो की आग से जलने के कारण मृत्यु हो गई है। उसने पुलिस को बताया था कि वर्ष 2023 में दोनों की जान-पहचान हुई थी और प्रेम संबंध के बाद 5 मई 2024 को आर्य समाज, बिलासपुर में विवाह किया था। विवाह के बाद दोनों गोकुल नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में किराये के मकान में रह रहे थे।

आरोपी ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन सुबह पत्नी फिल्म देखने के लिए निहारिका टॉकीज चलने की बात कह रही थी, जिसे लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। इसके बाद वह काम से केनरा बैंक, ट्रांसपोर्ट नगर चला गया। दोपहर में लौटने पर घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला। खिड़की से धुआं निकलता देख वह बालकनी के रास्ते घर में पहुंचा, जहां पत्नी का जला हुआ शव मिला।

मर्ग जांच के दौरान आरोपी के बार-बार बयान बदलने से पुलिस को संदेह हुआ। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ में आरोपी की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, उसने स्वीकार किया कि पत्नी की तकिये से मुंह और नाक दबाकर हत्या करने के बाद घटना को हादसा दर्शाने के लिए कमरे में कागज और कपड़े इकट्ठा कर आग लगा दी थी। इसके बाद 24 जुलाई 2025 को एफआईआर दर्ज कर 26 जुलाई को उसे गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश किया।

न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या के अपराध में आरोपी को आजीवन कारावास तथा 100 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 238 के तहत साक्ष्य नष्ट करने के अपराध में तीन वर्ष के कारावास एवं 100 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। इस अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने दोनों सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया।

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