Chhattisgarh

“मेरा रेशम, मेरा अभिमान” अभियान के तहत रेशमकीट पालकों को मिली वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी, उत्पादन बढ़ाने पर जोर

कोरबा के तुमान कोसा बीज केंद्र में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 50 से अधिक पालकों ने लिया हिस्सा, विशेषज्ञों ने बताए उन्नत रेशम पालन के तरीके

कोरबा, 4 अगस्त 2026। केंद्रीय रेशम बोर्ड के तत्वावधान में संचालित “मेरा रेशम, मेरा अभिमान” अभियान के अंतर्गत कोरबा जिले के तुमान स्थित कोसा बीज केंद्र में रेशमकीट पालकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के 50 से अधिक रेशमकीट पालकों ने भाग लिया और तसर रेशमकीट पालन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में सहायक संचालक रेशम, जिला कोरबा बलभद्र सिंह भण्डारी और कोसा बीज केंद्र तुमान के प्रभारी गुलशन कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान विशेषज्ञों ने रेशमकीट पालन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. विनोद सिंह ने रेशमकीट पालकों को तसर रेशम उत्पादन की उन्नत तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रेशमकीट पालन के दौरान होने वाले रोगों एवं कीटों के प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, बेहतर देखभाल और वैज्ञानिक पद्धति से पालन करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

डॉ. सिंह ने किसानों को सलाह दी कि वे रेशम पालन में वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करें, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो सके और उनकी आय में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर रेशम उत्पादन को अधिक प्रभावी और लाभदायक बनाया जा सकता है।

सहायक संचालक रेशम बलभद्र सिंह भण्डारी ने रेशमकीट पालकों को इस वर्ष बेहतर उत्पादन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों और नवीन तकनीकों के उपयोग से रेशम उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने किसानों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर विशेष ध्यान देने और विभागीय योजनाओं एवं तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ लेने की अपील की।

इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेशमकीट पालकों को नवीन वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना, तसर रेशम उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना तथा किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना था।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर कोसा बीज केंद्र तुमान के प्रभारी गुलशन कुमार ने केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा जिले में इस प्रकार के जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने रेशमकीट पालकों की सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद देते हुए भविष्य में भी प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेने का आग्रह किया।

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