Chhattisgarh

बैसाख माह में बदलें खान-पान और दिनचर्या, आयुर्वेदाचार्य डॉ. नागेंद्र शर्मा ने दी सलाह

कोरबा। हिंदी पंचांग के अनुसार बैसाख माह का आरंभ 3 अप्रैल 2026 से हो चुका है, जो 1 मई 2026 तक रहेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने लोगों को ऋतु परिवर्तन के इस समय में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

डॉ. शर्मा के अनुसार बैसाख माह बसंत ऋतु का अंतिम चरण और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत का समय होता है। इस दौरान मौसम में तेजी से बदलाव होता है, जिससे कफ और पित्त दोष के असंतुलित होने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि इस समय संक्रामक रोगों, अपच, उल्टी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं।

उन्होंने बताया कि इस संक्रमणकाल में खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है। गर्मी बढ़ने के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और हल्का, ताजा एवं सुपाच्य भोजन करना चाहिए। बासी और भारी भोजन से बचने की सलाह दी गई है।

वनस्पति तेल से परहेज, बेल का सेवन फायदेमंद
डॉ. शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि बैसाख माह में वनस्पति तेल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। वहीं बेल का सेवन इस मौसम में अत्यंत लाभकारी माना गया है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर को ठंडक प्रदान करता है।

क्या खाएं और क्या नहीं
उन्होंने आहार में जौ, सत्तू, दलिया, चावल, मूंग, चना, तुअर दाल, मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूज, आम, मौसंबी, नारियल और सब्जियों में लौकी, ककड़ी, कद्दू, करेला, सहजन, पुदीना आदि शामिल करने की सलाह दी। मसालों में जीरा, धनिया, हल्दी, इलायची और दालचीनी का सीमित उपयोग लाभकारी बताया।

वहीं बाजरा, पुराना गेहूं, उड़द, मसूर, मेथी, बैंगन, मूली, गोभी, अरबी, टमाटर और पपीता के सेवन से परहेज करने को कहा गया है। इसके साथ ही ज्यादा तेल-मसालेदार, भारी और देर से पचने वाले भोजन से दूरी बनाने की सलाह दी गई है।

दिनचर्या में रखें संतुलन
डॉ. शर्मा ने बताया कि सुबह जल्दी उठना, योग-प्राणायाम और हल्का व्यायाम करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। दिन में सोने, देर रात तक जागने, अत्यधिक श्रम करने और तामसिक भोजन से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि लोग आयुर्वेद के अनुसार ऋतुचर्या का पालन करें, तो वे न केवल मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि पूरे वर्ष स्वस्थ भी रह सकते हैं।

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