Chhattisgarh

लगभग डेढ़ साल से नहीं हो सकी है सब-कमेटी की तीसरी बैठक

रिटायर्ड कर्मियों की अटकी ग्रेच्युटी,लीज नीति पर निर्णय के इंतजार में श्रमिक

कोरबा । कोल इंडिया के रिटायर्ड कोलकर्मियों को लीज पर क्वार्टर दिये जाने के मुद्दे पर गठित सब कमेटी की तीसरी बैठक करीब डेढ़ साल के बाद भी आयोजित नहीं हो सकी है। दो वर्ष पहले जेबीसीसीआई मानकीकरण कमेटी की बैठक में इस सब कमेटी का गठन किया गया था। इसमें कोल इंडिया के अधिकारियों के अलावा मान्यता प्राप्त मजदूर संगठनों के नेताओं को शामिल किया गया था। सब कमेटी की पहली बैठक वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद बीसीसीएल धनबाद में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2025 में दूसरी बैठक दिल्ली में आयोजित हुई। दूसरी बैठक में निर्णय लिया गया था कि कमेटी कोल इंडिया की सभी कंपनियों में जाकर सरप्लस क्वार्टरों का आंकड़ा एकत्र करेगी और उसे तीसरी बैठक में प्रस्तुत करेगी। हालांकि अब तक तीसरी बैठक आयोजित नहीं हो सकी है। यूनियन नेताओं का कहना है कि सब कमेटी की बैठक में यह तय होना है कि क्वार्टर किन शर्तों पर लीज पर दिए जाएंगे। इसके बाद कमेटी अपनी अनुशंसा जेबीसीसीआई मानकीकरण कमेटी को सौंपेगी, ताकि कोल इंडिया इस पर ठोस निर्णय ले सके।वेतन समझौता 11 के दौरान जेबीसीसीआई की पहली बैठक में सदस्यों ने यह मुद्दा कोल इंडिया चेयरमैन के समक्ष उठाया था। संयुक्त मांग पत्र में रिटायर कर्मियों को क्वार्टर लीज पर देने की मांग भी शामिल थी। इसके बावजूद नवंबर 2021 में सर्कुलर जारी कर दिया गया। बाद में जेबीसीसीआई की पांचवीं बैठक में भी सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई। तब कोल इंडिया चेयरमैन ने समाधान निकालने का आश्वासन दिया था। इसके बाद जेबीसीसीआई मानकीकरण कमेटी की बैठक में सब कमेटी गठित की गयी।
नवंबर 2021 में कोल इंडिया के तत्कालीन निदेशक (कार्मिक) ने सभी अनुषांगिक इकाइयों के लिए एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि रिटायर कर्मी को कंपनी को क्वार्टर हैंडओवर करने के बाद ही ग्रेच्युटी राशि का भुगतान किया जाएगा। यदि कोई रिटायर्ड कर्मी तीन माह के भीतर क्वार्टर खाली नहीं करता है, तो उसकी ग्रेच्युटी रोक दी जाएगी। कोल इंडिया में हजारों रिटायर्ड कर्मियों का भुगतान प्रभावित है। इसके अलावा रिटायर कर्मियों की लीव इनकैशमेंट सहित अन्य देय राशि से क्वार्टर में रहने की अवधि के अनुसार पेनल रेंट भी काटा जा रहा है। क्वार्टर के प्रकार और क्षेत्र के अनुसार हर माह छह हजार से 12 हजार रुपये तक की कटौती हो रही है।
रिटायर्ड कोलकर्मियों का कहना है कि 30-40 वर्षों तक खदानों में जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं हो रहा है। एक ओर ग्रेच्युटी रोकी जा रही है, वहीं दूसरी ओर पेनल रेंट भी वसूला जा रहा है। उनका कहना है कि जेबीसीसीआईऔर जेसीएसी के नेता भी इस मुद्दे पर गंभीर पहल नहीं कर रहे हैं। रिटायर्ड कर्मियों ने यह भी कहा कि कंपनी के हजारों क्वार्टरों पर अवैध कब्जा है। ऐसे में सेल की तर्ज पर कोल इंडिया के क्वार्टरों को भी लीज पर देने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

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