जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही: मुख्यमंत्री साय

रायपुर, 10 सितंबर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि विद्यार्थियों और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरों की पहले पहचान कर उन्हें समय रहते दूर करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोखिमपूर्ण भवनों की जांच और सुरक्षा ऑडिट में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल तथा बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान यदि सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आती हैं तो उनके सुधार के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाए। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं इसकी नियमित निगरानी करें तथा यह सुनिश्चित करें कि शासन के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर दिखाई दे।
मुख्यमंत्री ने स्कूलों, पुस्तकालयों, छात्रावासों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थित पुराने एवं जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन भवनों की स्थिति जोखिमपूर्ण है या जिनसे जनहानि की आशंका है, उनकी तत्काल पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों के पालन में किसी प्रकार की शिथिलता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर दुर्घटना की आशंका को पहले ही समाप्त किया जा सके। इसके लिए शिकायत या दुर्घटना के बाद कार्रवाई की प्रवृत्ति के बजाय सतत निगरानी और समय रहते सुधार की कार्यसंस्कृति विकसित करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने अवैध एवं मिलावटी शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन के विरुद्ध प्रदेशभर में सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय से विशेष अभियान चलाकर संदिग्ध क्षेत्रों में संयुक्त टीमों के माध्यम से छापेमारी करने को कहा।
उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों और परिवहन मार्गों पर निगरानी बढ़ाने तथा दूसरे राज्यों से अवैध शराब की आवक पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए। पुलिस और आबकारी विभाग को सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान कर संयुक्त कार्रवाई करने तथा अवैध शराब के निर्माण अथवा मिलावट में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशों पर तत्काल अमल शुरू करने तथा जिलों में की गई कार्रवाई की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।




