Madhya Pradesh

‘उज्जैन में रामलला जैसा हाल नहीं होने देंगे!’ खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं हर्षानंद गिरी, रखी ये बड़ी मांग

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन के प्रसिद्ध ‘खड़े हनुमान मंदिर’ को शिफ्ट करने को लेकर चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। मामले में साधु-संतों की सीधी एंट्री हो चुकी है। आज साध्वी हर्षानंद गिरी मंदिर प्रांगण पहुंचीं, जहां उन्होंने बटुकों और संतों के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने मंदिर को हटाने का कड़ा विरोध किया और संत समाज से एकजुट होकर आगे आने की अपील की। मंदिर हटाने में मशीनरी के इस्तेमाल पर हर्षानंद गिरी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में प्रतिमा के दोनों तरफ करीब सात फीट गहरे गड्ढे खुदे हुए हैं। यह किसी जानवर के पंजों से नहीं खुदे, बल्कि वहां भारी मशीनों का इस्तेमाल कर प्रतिमा को जबरन स्थानांतरित करने का प्रयास हुआ है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार ने प्रतिमा को सुरक्षित रखने की कोशिश की, जिसका वे सम्मान करती हैं, लेकिन चार नाकाम कोशिशों के बाद अब पांचवां प्रयास बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

साध्वी ने कहा कि श्रद्धालु इस मंदिर को ‘छोटा AIIMS’ मानते हैं और हनुमान जी को वैद्य के रूप में पूजते हैं। अगर लोगों को यहां चमत्कार और स्वास्थ्य लाभ महसूस नहीं होता, तो देश भर से लोग यहां झाड़ा लगवाने और ताबीज पहनने न आते। उन्होंने कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन में भैरव बाबा, मां हरसिद्धि और खड़े हनुमान जी जैसे धार्मिक स्थलों को हटाने के प्रयास तुरंत बंद होने चाहिए। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि वे उज्जैन में अयोध्या के रामलला जैसा वर्षों लंबा इंतजार नहीं देखना चाहतीं।

साधु-संतों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हर्षानंद गिरी ने कहा कि जो लोग हिंदुओं को एक करने का दावा करते हैं, वे आज चुप क्यों हैं? उन्होंने कहा कि कई महामंडलेश्वर दर्शन करने आए, लेकिन खुलकर सामने नहीं आए। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर आज मठों, अखाड़ों और गद्दियों से बाहर निकलकर साधु-संत हनुमान जी के साथ खड़े नहीं होंगे, तो आने वाले समय में कुछ नहीं बचेगा। हनुमान जी के दर्शन टेंट में करने पड़ रहे हैं, यह पूरे संत समाज के लिए शर्म की बात है।

हर्षानंद गिरी ने साफ किया कि उनका मकसद सरकार के विकास कार्यों का विरोध करना नहीं है, लेकिन जहाँ हनुमान जी विराजमान हैं, अब वहीं दोबारा मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि अब प्रतिमा को हटाने की कोई भी कोशिश बंद की जाए और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए उसी स्थान पर एक भव्य मंदिर बनाया जाए।

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