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खड़े हनुमान मंदिर पर उमड़ा आस्था का सैलाब: बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचने लगे श्रद्धालु, हिंदूवादी संगठनों ने भी डाला डेरा

उज्जैन। Ujjain Khade Hanuman Mandir : सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी चौड़ीकरण की जद में आया उज्जैन का प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर अब सिर्फ शहर ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर मंदिर से जुड़े वीडियो और रील लगातार वायरल हो रहे हैं और दूर-दराज से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं। प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करने के लिए प्रशासन की ओर से कई प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हट पाई है। इसी के बाद श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा और तेज हो गई है कि “शायद बाबा खुद यहां से नहीं जाना चाहते।” यह भक्तों की आस्था से जुड़ी मान्यता है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब हिंदू संगठन भी मैदान में

मंगलवार को भी मंदिर परिसर में विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े पदाधिकारी पहुंचे थे। यहां सुंदरकांड का पाठ और महाआरती भी की गई थी। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़ी जनभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि आगे संतों, समाज के प्रमुख लोगों और हिंदू संगठनों से चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रशासन से भी बातचीत की जाएगी और आगे की रणनीति तय होगी।

संगठन बोला- विकास चाहिए, लेकिन आस्था की कीमत पर नहीं

संगठन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण शहर के लिए जरूरी है और वे विकास का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि विकास कार्य करते समय धार्मिक स्थलों और लोगों की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाए। पदाधिकारियों ने कहा कि जो भी फैसला होगा, वह संतों और समाज की राय लेकर किया जाएगा। उनका कहना है कि अगर बाबा की प्रतिमा यहां से नहीं हट पा रही है तो प्रशासन को भी इस स्थिति पर पुनर्विचार करना चाहिए।

श्रद्धालुओं का लगातार बढ़ रहा तांता

खड़े हनुमान मंदिर के बाहर इन दिनों सुबह से रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है। मंदिर समिति और स्थानीय लोगों के मुताबिक उज्जैन के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु मंदिर के मौजूदा स्थान पर ही बाबा को विराजमान रखने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक खड़े हनुमान जी को लंबे समय से “उज्जैन का एम्स” भी कहा जाता है। यहां बच्चों और परिवारों को लेकर आने की भी पुरानी मान्यता है। यही वजह है कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के बीच मंदिर को लेकर लोगों की भावनाएं और ज्यादा मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।

170 साल पुरानी प्रतिमा होने का दावा

मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक खड़े हनुमान मंदिर और प्रतिमा का इतिहास करीब 170 साल पुराना है और साल 1857 से जुड़े दस्तावेज होने का दावा किया जा रहा है। वहीं कुछ स्थानीय लोगों ने इसे इससे भी प्राचीन, यहां तक कि परमारकालीन होने की बात कही है। हालांकि प्रतिमा की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक काल को लेकर विशेषज्ञों की वैज्ञानिक जांच ही अंतिम आधार होगी।मौजूदा विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्राचीन प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए कैसे स्थानांतरित किया जाए ।

अब मामला सिर्फ सड़क चौड़ीकरण का नहीं

खड़े हनुमान मंदिर को लेकर अब मामला सिर्फ एक मंदिर को दूसरी जगह ले जाने तक सीमित नहीं रह गया है । एक तरफ सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास की जरूरत है, तो दूसरी तरफ श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है।अब हिंदू संगठन भी सक्रिय हो गए हैं और संतों, समाज के प्रमुख लोगों तथा प्रशासन के साथ बातचीत की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि तकनीकी रिपोर्ट क्या कहती है और प्रशासन श्रद्धालुओं की भावनाओं और विकास की जरूरत के बीच क्या रास्ता निकालता ह। फिलहाल बाबा के दरबार में भक्तों का तांता लगा है और लोगों की एक ही मांग सुनाई दे रही है-“विकास हो, लेकिन बाबा का स्थान भी सुरक्षित रहे।

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