महिला किसान चंद्रकांता को जमीन की रजिस्ट्री में मिली 9,510 रुपये की राहत, 4 से 2 प्रतिशत हुआ पंजीयन शुल्क

रायपुर, 25 सितंबर 2026। अपने नाम जमीन होना महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के सरोना निवासी महिला किसान चंद्रकांता नेताम को अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने पर शासन की शुल्क रियायत का सीधा लाभ मिला। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किए जाने और स्टाम्प शुल्क में पहले से मिल रही 1 प्रतिशत की छूट के चलते उन्हें रजिस्ट्री में कुल 9,510 रुपये की आर्थिक राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग के साथ संवाद के दौरान चंद्रकांता नेताम ने अपने अनुभव साझा किए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन व्यवस्था को नागरिकों के लिए सरल और सुविधाजनक बनाने के साथ महिलाओं को संपत्ति के पंजीयन में आर्थिक राहत देने की दिशा में पहल की जा रही है। इसका लाभ अब महिला किसानों और अन्य महिला हितग्राहियों को सीधे मिल रहा है।
चंद्रकांता नेताम ने बताया कि जमीन अपने नाम कराने के दौरान उन्हें महिलाओं के लिए लागू शुल्क रियायत का लाभ मिला। पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत के बजाय 2 प्रतिशत होने से रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ। इसके अलावा महिला क्रेता को स्टाम्प शुल्क में पहले से मिल रही 1 प्रतिशत की छूट भी प्राप्त हुई। दोनों रियायतों के चलते उन्हें कुल 9,510 रुपये की बचत हुई। उन्होंने बताया कि किसान परिवार के लिए रजिस्ट्री में बचने वाली यह राशि काफी महत्वपूर्ण है। चंद्रकांता ने शुल्क में दी जा रही इस राहत को महिलाओं के हित में उपयोगी पहल बताते हुए शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार जताया।
महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में रियायत का उद्देश्य केवल रजिस्ट्री का खर्च कम करना ही नहीं है, बल्कि महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व से जोड़ना भी है। शुल्क में राहत मिलने से परिवारों को महिलाओं के नाम जमीन या अन्य संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। इससे महिलाओं की संपत्ति में भागीदारी बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक सुरक्षा और परिवार की वित्तीय व्यवस्था में भूमिका भी मजबूत हो सकती है।
पंजीयन विभाग द्वारा आर्थिक राहत के साथ रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाओं से नागरिकों के लिए पंजीयन प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है। संपत्ति की लोकेशन आधारित फोटो जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।
पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था भी लागू की गई है। इसके माध्यम से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है, जिससे नागरिकों को अलग से नामांतरण की प्रक्रिया के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होती है।
चंद्रकांता नेताम को मिली 9,510 रुपये की बचत यह दर्शाती है कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में दी जा रही रियायत का सीधा आर्थिक लाभ हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। जमीन अपने नाम होने से महिला की संपत्ति में भागीदारी मजबूत होती है और शुल्क में कमी इस प्रक्रिया को पहले की तुलना में कम खर्चीला बनाती है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर सेवाओं में हुए बदलाव और उनके अनुभव सामने ला रहा है। चंद्रकांता नेताम की कहानी इसी पहल का उदाहरण है, जिसमें शुल्क में राहत के साथ तकनीकी सुविधाओं के जरिए संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया को महिलाओं के लिए अधिक सुविधाजनक और किफायती बनाने का प्रयास किया जा रहा है।




