कचरे में सरकारी दस्तावेज और मिनी माता की तस्वीर! जनपद पंचायत बरमकेला में व्यवस्था पर गंभीर सवाल

पुरानी मनरेगा शाखा बनी गंदगी का अड्डा, सरकारी अभिलेखों की दुर्दशा पर उठे सवाल—कार्यालय के रख-रखाव और जवाबदेही की जांच की मांग
सारंगढ़ । सारंगढ़ बिलाईगढ जिले के जनपद पंचायत बरमकेला कार्यालय की पुरानी मनरेगा शाखा में जिस तरह सरकारी दस्तावेज तितर-बितर हालत में पड़े दिखाई दे रहे हैं, वह महज गंदगी का मामला नहीं बल्कि सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा और कार्यालयीन जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। कमरे में गंदगी का आलम है, दुर्गंध फैली हुई है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के इस तरह बेतरतीब पड़े होने से रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होना स्वाभाविक है।

सबसे गंभीर और संवेदनशील तस्वीर तब सामने आती है, जब मिनी माता की तस्वीर भी कचरे के बीच पड़ी दिखाई देती है। सवाल यह है कि यदि तस्वीर को सम्मानपूर्वक रखने की व्यवस्था नहीं थी तो उसे कार्यालय में लगाया ही क्यों गया? महापुरुषों और महान विभूतियों की तस्वीरों का इस तरह कचरे के बीच पड़ा मिलना कार्यालय की संवेदनशीलता और रख-रखाव व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा कौन करेगा?
सरकारी कार्यालय में रखे अभिलेख केवल कागज के टुकड़े नहीं होते। उनमें योजनाओं, कार्यों, भुगतान, स्वीकृतियों और प्रशासनिक निर्णयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है। ऐसे दस्तावेजों का सुरक्षित, व्यवस्थित और संरक्षित रहना जरूरी है। लेकिन जनपद पंचायत बरमकेला की पुरानी मनरेगा शाखा की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि रिकॉर्ड प्रबंधन और कार्यालय की साफ-सफाई को लेकर जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता है। यदि किसी सरकारी अभिलेख के खराब होने, गुम होने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति उत्पन्न होती है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? क्या पुराने रिकॉर्ड का कोई संरक्षण रजिस्टर है? क्या दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित स्थान और व्यवस्था है? इन सवालों का जवाब सामने आना चाहिए।
कौन अधिकारी आया,कौन गया—व्यवस्था पर भी सवाल
जनपद पंचायत कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति, शाखाओं का संचालन और कार्यालयीन अनुशासन भी लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कौन अधिकारी किस शाखा का प्रभारी है, कौन अधिकारी कार्यालय में उपस्थित है और कौन अनुपस्थित—आम लोगों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है। कार्यालय की व्यवस्था, कर्मचारियों की जवाबदेही, अभिलेखों की सुरक्षा, स्वच्छता और प्रशासनिक अनुशासन पर निगरानी रखना भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व है।
अब जांच जरूरी, जिम्मेदारी भी तय हो-
पुरानी मनरेगा शाखा की वास्तविक स्थिति की स्थलीय जांच कराई जानी चाहिए। सरकारी दस्तावेज किस हालत में हैं, वे किसके संरक्षण में हैं, कमरे की सफाई क्यों नहीं हुई, मिनी माता की तस्वीर कचरे में कैसे पहुंची और संबंधित शाखा की जिम्मेदारी किस अधिकारी-कर्मचारी की है—इन सभी बिंदुओं पर जांच होनी चाहिए।साथ ही कार्यालय में उपस्थिति व्यवस्था, शाखावार प्रभारी, रिकॉर्ड प्रबंधन, साफ-सफाई और कर्मचारियों की जवाबदेही की भी समीक्षा आवश्यक है। जनता का सवाल सीधा है—सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं या लापरवाही का अड्डा बनने के लिए? बरमकेला जनपद पंचायत में यदि व्यवस्था चरमराई हुई है तो केवल खानापूर्ति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। जरूरत इस बात की है कि सक्षम और जवाबदेह नेतृत्व में कार्यालयीन व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और आम जनता को अधिकारी-कर्मचारियों की तलाश में भटकना न पड़े। अब सवाल सिर्फ गंदगी का नहीं है—सवाल सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा, प्रशासनिक अनुशासन और सरकारी कार्यालय की गरिमा का है।




