नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 162 की मौत; 844 लापता लोगों में 133 भारतीय भी शामिल

नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड में मौतों का आंकड़ा बढ़कर कम से कम 162 हो गया है। करीब 844 लोग लापता हैं, जिनमें 133 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई शामिल हैं। इनमें से कई कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।

पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और संवेदना व्यक्त की। भारत हर संभव मानवीय सहायता देने को तैयार है। भारतीय वायुसेना के विमानों से राहत सामग्री भेजी जा रही है और एनडीआरएफ टीमें तैनात करने की तैयारी है। नेपाल ने पीएम मोदी का आभार जताया है।
उत्तर प्रदेश ने 1070 हेल्पलाइन सक्रिय की है
भारतीय दूतावास (चीन) ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन जारी किए हैं। उत्तर प्रदेश ने 1070 हेल्पलाइन सक्रिय की है। महाराष्ट्र ने पर्यटकों की जानकारी जुटाने के लिए डेटा लिंक शुरू किया है।
इस तबाही ने 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई जलप्रलय की याद दिला दी। नेपाल में बाढ़ के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है और दोनों राज्य अलर्ट पर हैं।
एनडीआरएफ की 20 टीमों को तैनात कर दिया गया है
एनडीआरएफ की 20 टीमों को तैनात कर दिया गया है। इस तबाही में अब तक चीन में तीन लोगों समेत लगभग 162 लोगों की मौत हुई है और 133 भारतीयों समेत लगभग 844 लोग लापता हैं। लापता भारतीयों में अधिकांश कैलास-मानसरोवर तीर्थयात्री हैं। चीन और नेपाल के अधिकारियों ने मरने वालों की संख्या बढ़ने और भारी तबाही की आशंका जताई है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया और उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।
(आइपीपीएएन) के अनुसार, प्रभावित चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। नेपाल सरकार ने बताया कि बाढ़ में गाड़ियों के चलने लायक 19 पुल बह गए हैं।
इंटरनेट मीडिया पर छाई रहीं तबाही की तस्वीरें और वीडियो
नेपाल में आई बाढ़ के बाद इंटरनेट मीडिया पर भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे स्थित बस्तियों में हुई तबाही की तस्वीरें और वीडियो छाए रहे। एक वीडियो में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी में भारी पैमाने पर तबाही नजर आ रही है।
वीडियो में तेज बहाव के साथ एक विशाल लहर को दो मंजिला इमारत के ऊपर से गुजरते और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहाते हुए देखा जा सकता है। कई लोगों को पहले पानी आने की आवाज सुनकर भागते हुए देखा गया, लेकिन कुछ ही सेकेंड में वे अचानक आई बाढ़ के बाद जमा हुए कीचड़ और मलबे में दब गए।
प्रेट्र के अनुसार, एक क्लिप में चार मंजिला इमारत को उफनते पानी में बहते हुए देखा जा सकता है, जबकि दूसरी क्लिप में रसुवा में तेजी से बहते बाढ़ के पानी में एक कार तैरती हुई दिखाई दी। एक और वीडियो क्लिप में पानी के जबरदस्त बहाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता हुआ दिखा। एक क्लिप में पुलों को तेज बहाव टूटते और बहते हुए दिखाया गया।
धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराता हुआ दिखा, जिसके बाद पुल ढह गया और बह गया। एक और वीडियो में मटमैले पानी को तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेते और लगभग 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाते हुए दिखाया गया।
रॉयटर के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा के चीन वाले हिस्से में लगे सिक्योरिटी कैमरे की फुटेज में कई लोगों को भागते हुए देखा गया। लेकिन तेज बहाव इमारतों व गाड़ियों को तबाह कर गया और कई लोगों की जान ले ली।
42 किलोमीटर लंबी सड़क बही
‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा में रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क को बहा ले गई। बाढ़ के पानी ने कई स्थानों पर सड़कों को नष्ट कर दिया और कई कंक्रीट के पुल भी बह गए।
उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चामेली गुरूंग के हवाले से बताया कि स्याफ्रूबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं।
पिछले साल भी आई थी बाढ़
पिछले साल भी भोटेकोशी में दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी। इसमें रसुवा में भारी तबाही हुई थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।
चीन ने कहा, गिरोंग पोर्ट हुआ प्रभावित
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि तिब्बत में आई बाढ़ ने गिरोंग काउंटी में स्थित गिरोंग बंदरगाह प्रभावित हुआ है और शिगात्से इलाके में सड़कें, संचार व बिजली की लाइनें कट गई हैं। ड्रोन फुटेज में बंदरगाह पर कुछ इमारतें मलबे में दबी हुई दिखाई दे रही हैं।
चीनी मीडिया के अनुसार, बचाव अभियान के लिए 601 कर्मचारी और 113 गाड़ियां तैनात की हैं। खोजी कुत्ते और बचाव उपकरण भी भेजे हैं। एक बचावकर्मी ने बताया कि ड्रोन से शुरुआती जांच के बाद पता चला कि सीमा तक जाने वाली सभी सड़कें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं।
लगातार बारिश हो रही है, इसलिए पानी का स्तर कभी भी बढ़ सकता है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों की तलाश और उन्हें बचाने के लिए हर संभव कोशिश करने का आदेश दिया है। उन्होंने निगरानी व शुरुआती चेतावनी को मजबूत करने और वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
चीन की बेवकूफी पर जाएगा दुनिया का ध्यान : ब्रह्मा चेलानी
रणनीतिक विचारक, लेखक और टिप्पणीकार डा. ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि हिमालय दुनिया की सबसे बड़ी भूकंप-सक्रिय पर्वतमाला है। यहां विनाशकारी भूकंप आते रहे हैं।
नेपाल में आई बाढ़ से यह बात साफ हो गई कि कैसे भूकंप की एक मामूली घटना भी बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है। तिब्बत-नेपाल सीमा पर आए 4.4 तीव्रता के भूकंप ने ऐसी आपदा पैदा की कि अचानक आई बाढ़ में नेपाल के कई गांव बह गए।
इस घटना से दुनिया का ध्यान फिर से चीन की उस बेवकूफी पर जाएगा, जिसके तहत वह हिमालय के भूकंप-संवेदी इलाके में दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा है।
भारत-तिब्बत सीमा के पास बन रहा यह प्रोजेक्ट एक वाटर बम जैसा है, जो भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को डुबो सकता है और आगे चलकर बांग्लादेश में भी भारी तबाही मचा सकता है।
आपात नंबर
नेपाल में भारतीय दूतावास के नंबर : +977 985 131 6807 एवं +977 970 910 7500
बीजिंग में भारतीय दूतावास का नंबर : 0086 185 1428 4905
नेपाल पर्यटन बोर्ड के नंबर : 1234 (टोलफ्री), 1144 (हॉटलाइन), पर्यटन पुलिस 9851289445




