धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP, सरकार को दी सख्त फैसलों की चेतावनी; आज तीसरे दौर की वार्ता पर सबकी नजर

नई दिल्ली। NEET परीक्षा विवाद और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर केंद्र सरकार तथा CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के बीच जारी बातचीत के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन गई है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक बातचीत का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल सकता। CJP ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी प्रमुख मांग पर निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आगे सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होगा।
25 जुलाई को केंद्र सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है। इससे पहले पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पहले दो दौर की बैठकों में कुछ मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला।
आशुतोष रांका ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। उन्होंने कहा कि मीडिया में लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि सरकार मंत्री का इस्तीफा नहीं लेने जा रही है। यदि ऐसा है तो फिर लगातार बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार बताए कि इस्तीफा होगा या नहीं, ताकि पार्टी अपनी आगे की रणनीति तय कर सके।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर अड़ियल रवैया अपना रही है। रांका ने कहा कि यदि सरकार एक आसान फैसले को भी लेने के लिए तैयार नहीं है, तो फिर बड़े सुधारों की उम्मीद करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का यही रवैया जारी रहा तो CJP को भी सख्त फैसले लेने पड़ेंगे।
CJP प्रवक्ता ने NEET पेपर लीक और उससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर शिक्षा मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों और छात्रों के भविष्य से जुड़े संकट की अंतिम जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की है। इसी कारण पार्टी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग कर रही है।
बैठक से पहले आशुतोष रांका ने यह भी कहा कि NEET परीक्षा से प्रभावित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और कानूनी मामलों पर सरकार के साथ सकारात्मक चर्चा हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तीसरे दौर की बैठक में भी कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बन सकती है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर फैसला सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।
इस दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को हटाए जाने की खबरों पर भी CJP ने प्रतिक्रिया दी। आशुतोष रांका ने कहा कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि किन अधिकारियों को हटाया गया है और इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही पार्टी इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया देगी।
CJP ने यह भी बताया कि 24 जुलाई को हुई दूसरे दौर की बैठक के दौरान पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार को शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों के लिए एक विस्तृत डिमांड चार्टर सौंपा है। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीरता से काम करती है तो CJP रचनात्मक सहयोग देने के लिए तैयार है।
अब 25 जुलाई को होने वाली तीसरे दौर की वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, NEET परीक्षा विवाद, शिक्षा सुधार और अन्य प्रमुख मुद्दों पर आगे की दिशा तय हो सकती है। यदि सरकार और CJP के बीच सहमति नहीं बनती है, तो पार्टी अपने आंदोलन को और तेज करने का फैसला ले सकती है।




