Chhattisgarh

लेमरू एलिफेंट रिजर्व के अध्ययन में जुटी विशेषज्ञों की टीम, ग्रामीणों से लेकर वन प्रबंधन तक का होगा व्यापक मूल्यांकन

कोरबा। भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित लेमरू एलिफेंट रिजर्व के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए देहरादून से वन्यजीव विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की टीम कोरबा पहुंची है। टीम हाथियों के प्राकृतिक आवास, उनके विचरण क्षेत्र, मानव-हाथी संघर्ष तथा वर्तमान वन प्रबंधन व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।

अध्ययन दल ने सबसे पहले कटघोरा वन मंडल का दौरा किया, जहां वनमंडलाधिकारी कुमार निशांत ने हाथियों के प्रवेश एवं निकास मार्ग, प्रमुख कॉरिडोर, स्थायी आवास और संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी दी। इसके बाद टीम ने कोरबा वन मंडल का भ्रमण किया। यहां वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव तथा एसडीओ एस.के. सानी ने बालको और लेमरू वन परिक्षेत्र में हाथियों के आवास, वन संरक्षण कार्यों तथा प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं से अवगत कराया।

भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में वन प्रबंधन में सुधार, हाथियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित करने और सतत निगरानी व्यवस्था के कारण मानव-हाथी संघर्ष के मामलों के साथ-साथ जन-धन एवं फसलों को होने वाले नुकसान में उल्लेखनीय कमी आई है।

वैज्ञानिकों की टीम ने वनांचल के कई गांवों का दौरा कर स्थानीय ग्रामीणों से भी संवाद किया। इस दौरान हाथियों की गतिविधियों, मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति, ग्रामीणों के अनुभव तथा सुरक्षा उपायों से जुड़ी जानकारी एकत्र की गई, ताकि अध्ययन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी और अनुभवों को भी शामिल किया जा सके।

दल में आईएफएस अधिकारी आज़ा खान, वन्यजीव विशेषज्ञ सावियो अल्वारेस, पर्यावरण विशेषज्ञ रंजन सरोदे, देहरादून स्थित वैज्ञानिक संस्थान के सहायक फैकल्टी डॉ. आलोक कुमार सिंह तथा वैज्ञानिक डॉ. आर. सुरेश कुमार शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार अध्ययन के दौरान हाथियों के आवास, उनके मूवमेंट पैटर्न, वन प्रबंधन की प्रभावशीलता और स्थानीय समुदायों के अनुभवों का समग्र विश्लेषण किया जाएगा। इस अध्ययन के आधार पर तैयार रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी, जिससे प्रस्तावित लेमरू एलिफेंट रिजर्व के संरक्षण, प्रबंधन और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।

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