84 दिन साथ लेकिन सेक्स नहीं किया, शादी के 5 महीने बाद मांगा तलाक, अब दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Delhi High Court Divorce Verdict: 84 दिन साथ लेकिन सेक्स नहीं करने और फिर इसके आधार बनाकार तलाक मांगने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 84 दिन साथ रहने के बाद अलग हुए दंपत्ति को एक साल की अनिवार्य अवधि पूरी होने से पहले तलाक की राहत दी है। हाईकोर्ट ने दंपत्ति को तलाक के लिए मंजूरी दे दी है। हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम में बड़ा फेरबदल करते हुए दंपत्ति को एक साल से पहले इस तलाक की मंजूरी दी है।
दरअसल दंपत्ति ने दिसंबर 2025 में आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। दोनों 84 दिन साथ रहे। इसके बाद अलग होने का फैसला कर लिया। 23 फरवरी 2026 से दोनों अलग रह रहे थे। मई 2026 में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। दोनों ने कहा कि उनके बीच संबंध (सेक्स) नहीं बने हैं। आपसी तालमेल की कमी है। लिहाजा इसे यही खत्म करना चाहते हैं।
मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक चौधरी और रेणु भटनागर ने की। बेंच नेकहा कि दो जवान लोगों के जीवन का सवाल होता है, वहां एक साल का इंतजार सही नहीं है। उनको नई जिदंगी शुरू करने का मौका दिया जाना चाहिए। ये बात कानून और समाज के हित में है। ऐसे रिश्तों का कोई महत्व नहीं है, जो कानून के सख्त नियमों के कारण कागजों पर बने रहें। बेंच ने कहा कि पारीवारिक संबंधों पर ये एक साल साथ रहे की कानूनी बंदिश इसलिए लगाई गई थी, ताकि पति-पत्नी को फिर से नया जीवन शुरू करने का अवसर मिल सके। यहां 84 दिन साथ में रहने के बाद भी दंपत्ति से शारीरिक संबंध नहीं बनाए। जहां शुरुआत ही खराब हो, वहां जबरन कागजी बंधन सही नहीं है।
दरअसल याचिका की सुनवाई पहले तीस हजारी कोर्ट स्थित फैमली कोर्ट में हुई थी। मामले में फैमिली कोर्ट की ओर से कहा गया कि दंपत्ति की ओर से शारीरिक संबंध न बनने का कारण नहीं बताया है। लिहाजा कानून तलाक की अर्जी को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद दंपत्ति ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट की बेंच ने तीस हजारी स्थित फैमली कोर्ट को निर्देश दिया है कि वो इस दंपत्ति की तालाक याचिका को तुरंत स्वीकार करेृ। बेंच ने कहा कि अब इस दंपत्ति का समय न बर्बाद किया जाए।




