7 माह बाद भी तबादला आदेश पर अमल नहीं! मोहनीश आनंद देवांगन को लेकर उठे सवाल, CM हेल्पलाइन में शिकायत

मोहनीश के तबादले पर सवाल, सात माह बाद भी शासन के आदेश का पालन नहीं
कोरबा। जनपद पंचायत पाली में सहायक परियोजना अधिकारी मोहनीश आनंद देवांगन के तबादले को लेकर शासन के आदेश के पालन पर सवाल उठने लगे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 20 फरवरी 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश में मोहनीश आनंद देवांगन का तबादला सूरजपुर जिले से सक्ती जिला किया गया था। आदेश जारी होने के करीब सात माह बाद भी उनके कार्यमुक्त नहीं होने का मामला अब कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल तक पहुंच चुका है। शिकायतकर्ता ने मामले में शासन के स्थानांतरण आदेश का पालन कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
ग्राम पंचायत बरपाली निवासी लखन गोस्वामी ने 17 जून 2026 को कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर मोहनीश आनंद देवांगन को कोरबा जिले से भारमुक्त कर शासन के स्थानांतरण आदेश का पालन कराने की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शासन द्वारा स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी को अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि स्थानांतरण आदेश में कोई संशोधन, स्थगन या निरस्तीकरण हुआ है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं की गई।
कलेक्टर स्तर पर शिकायत के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने 20 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल यानी सीएम हेल्पलाइन 1076 में भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत क्रमांक WP260700107204 में स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं होने, अधिकारी को कार्यमुक्त नहीं किए जाने तथा पूर्व में की गई शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का उल्लेख किया गया। शिकायतकर्ता ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
मामले में 15 सितंबर 2026 को जनपद पंचायत पाली की ओर से जवाब जारी किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, जवाब में कहा गया है कि शिकायत विभागीय स्थापना से संबंधित होने के कारण सीएम हेल्पलाइन की शिकायत प्रणाली के अंतर्गत मान्य नहीं है और इसे ‘स्पेशल क्लोजर’ के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने इस प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जिस अधिकारी के तबादले से संबंधित शिकायत है, उसी कार्यालय स्तर से शिकायत के निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
मामले का एक प्रमुख सवाल यह है कि 20 फरवरी 2026 के स्थानांतरण आदेश के बाद अब तक संबंधित अधिकारी को कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया। यदि शासन के आदेश में बाद में कोई संशोधन, स्थगन अथवा निरस्तीकरण हुआ है तो उसका आदेश सामने आना चाहिए। वहीं, यदि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है तो स्थानांतरण आदेश के बावजूद अधिकारी के वर्तमान पद पर बने रहने का आधार क्या है, यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
शिकायतकर्ता अब मामले को न्यायालय में ले जाने की तैयारी में है। सात माह पुराने स्थानांतरण आदेश के पालन और शिकायत के निराकरण की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा शुरू कर दी है। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग शासन के स्थानांतरण आदेश की वर्तमान स्थिति और मोहनीश आनंद देवांगन को कार्यमुक्त नहीं किए जाने के कारणों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।




