बड़ी साइज की व्हीलचेयर देने के बजाय लीपापोती में जुटा समाज कल्याण विभाग, वृद्धाश्रम ने अफसरों पर लगाया गुमराह करने का आरोप

कोरबा। जरूरतमंद बुजुर्ग को राहत पहुंचाने के बजाय समाज कल्याण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अब मामले में लीपापोती और तथ्य छिपाने में जुट गए हैं। प्रशांति वृद्धाश्रम में रह रहे 74 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक हीरालाल चौहान के लिए बड़ी साइज की व्हीलचेयर की मांग महीनों पहले किए जाने के बावजूद अब तक व्यवस्था नहीं हो सकी है, जबकि विभाग अपने बचाव में भ्रामक जानकारी परोस रहा है।
जानकारी के अनुसार, 19 फरवरी 2026 को समाज कल्याण विभाग के उप संचालक को लिखित आवेदन देकर स्पष्ट रूप से बड़ी साइज की व्हीलचेयर उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। आवेदन में बताया गया था कि वृद्धाश्रम में मौजूद सभी व्हीलचेयर छोटी साइज की हैं, जिनका उपयोग भारी शरीर वाले हीरालाल चौहान के लिए बेहद असुविधाजनक है। उनकी पुरानी बड़ी व्हीलचेयर भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
दो महीने से ज्यादा समय बीत जाने और विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर 27 अप्रैल 2026 को कलेक्टर से भी लिखित शिकायत कर बड़ी साइज की व्हीलचेयर उपलब्ध कराने की मांग की गई। इसके बावजूद विभाग ने समस्या का समाधान करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश शुरू कर दी।
26 मई को जनसंपर्क विभाग के माध्यम से जारी प्रेस विज्ञप्ति में समाज कल्याण विभाग के उप संचालक हरीश सक्सेना ने दावा किया कि हीरालाल चौहान को 19 दिसंबर 2025 को ही व्हीलचेयर उपलब्ध करा दी गई थी। जबकि वृद्धाश्रम प्रबंधन का कहना है कि भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम, जबलपुर द्वारा उपलब्ध कराई गई सभी व्हीलचेयर छोटी साइज की हैं और इन्हीं के अनुपयुक्त होने की जानकारी पहले ही विभाग को दी जा चुकी थी।
वृद्धाश्रम प्रबंधन का आरोप है कि बुजुर्ग की वास्तविक जरूरत समझने और समाधान निकालने के बजाय अधिकारी अपने उच्चाधिकारियों और मीडिया को गुमराह करने में लगे हैं। नवदृष्टि समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उप संचालक हरीश सक्सेना और परीवीक्षा अधिकारी मुकेश दिवाकर लंबे समय से प्रशांति वृद्धाश्रम के प्रति उपेक्षापूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। इस संबंध में कई बार प्रशासन से शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
संस्था ने सवाल उठाया है कि जब एक असहाय बुजुर्ग की मूलभूत जरूरत तक पूरी नहीं की जा रही, तो फिर समाज कल्याण विभाग आखिर किसका कल्याण कर रहा है?
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