एक माह बाद परिजनों से मिली बालिका: छत्तीसगढ़ से भटककर अनूपपुर पहुंच गई थी 6 साल की बीना, बाल दिवस पर दादी को सौंपा

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अनूपपुर31 मिनट पहले
बीना झारिया की दादी।
बाल दिवस पर किरगी रोड कोटा छत्तीसगढ़ की 6 वर्षीय बालिका को उसका घर मिल गया। बालिका बीना झारिया को करीब एक महीने बाद उसके परिजन मिले। अपनी दादी से मिलकर बीना उनके गले लग गई। एक माह पहले बीना घर से भटक कर अनूपपुर पहुंच गई थी।
बाल कल्याण समिति के सदस्य ललित दुबे ने बताया कि बालिका बीना उन्हें रेलवे स्टेशन के पास मिली थी। उसका वन स्टाप सेंटर में प्रवेश कराया गया। बालिका की काउंसिलिंग शुरू कर उसके परिवार वालों की जानकारी ली। बालिका सही तरीके से अपने परिजनों का पता नहीं बता पा रही थी। समिति ने बालिका के परिजनों को तलाश करने के लिए विभिन्न प्रयास किए गए बालिका से लगातार बातचीत कर उसके परिवार का पता लगाने का प्रयास किया जाता रहा। बालिका लोरामी के आसपास की रहने वाली है।

परिजनों के साथ कल मनाएगी जन्मदिन
समिति सदस्य ललित दुबे द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता बजरंग जायसवाल जो कोटा छत्तीसगढ़ के निवासी हैं से समिति द्वारा मदद के लिए कहा गया। बजरंग जायसवाल द्वारा कोटा छत्तीसगढ़ के आसपास पता करने पर उसकी बुजुर्ग दादी मिली। कोटा पुलिस के सहयोग से उसे दादी के सुपुर्द किया गया। बालिका अपनी दादी मेडिया देवी झरिया को मिलकर खुशी से झूम उठी। दादी भी भावुक हो गई और अपने आंसू नहीं रोक सकी। दादी पोती के मिलन से समिति का माहौल खुशनुमा हो गया। 15 नवंबर को बीना का जन्मदिन है। अब वह अपने परिजनों के साथ जन्मदिन मनाएगी।
पिता के देहांत के बाद मां ने छोड़ा
बीना के पिता का देहांत हो चुका है। उसके देहांत के बाद उसकी मां ने उसको छोड़ कर चली गई थी। मां ने जब छोड़ा तो बीना की उम्र 1 वर्ष थी। बीना की देखभाल उसकी दादी करती थी। 15 अक्टूबर को बिना अचानक घर से कहीं चली गई थी। इसके बाद उसकी दादी ने आसपास पता किया, लेकिन कहीं पता नहीं चला। कुछ लोगों ने बीना को ट्रेन में चढ़ते देखा था। इसके बाद दादी ने गुमशुदगी की शिकायत थाने में दर्ज कराई।
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