पद्मश्री अनुज शर्मा के गीतों पर थिरका रायगढ़, छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत से सजी पहली शाम

रायगढ़,14 सितंबर । कला, संस्कृति, संगीत और नृत्य की गौरवशाली परंपरा को समर्पित 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह का पहला दिन कला और भक्ति के विविध रंगों से सराबोर रहा। समारोह के शुभारंभ के बाद देर शाम पद्मश्री अनुज शर्मा की छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत से सजी प्रस्तुति ने रामलीला मैदान में मौजूद दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी लोकप्रिय लोकधुनों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं और पूरा मैदान उत्साह से गूंज उठा।
भक्तिरस से हुई प्रस्तुति की शुरुआत
पद्मश्री अनुज शर्मा ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत “अहो भजो मन गणपति गणराज, सुमति मन…” जैसी भक्तिमय प्रस्तुति से की। इसके बाद “मंगल भवन अमंगल हारी…”, “राम सिया राम” और “मैंने तेरे भरोसे हनुमान” जैसे भजनों ने समारोह स्थल को भक्तिरस से भर दिया।
भक्ति गीतों के बाद अनुज शर्मा ने छत्तीसगढ़ की माटी, संस्कृति और लोकजीवन से जुड़े लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। “अली गली में टुकनी मंगाये, मोर महामाई हरियर ज्वारा लागे वो”, “छइयां भुइयां”, “माते-माते रहिबे अलबेला मोर” और “अहो दौना पान…” जैसे गीतों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया।
वहीं “ससुराल गेंदा फूल”, “भोली सुरतिया”, “मया होगे तोर संग” और “ये प्रीत वाली रानी…” जैसे लोकप्रिय गीतों पर भी दर्शकों ने जमकर उत्साह दिखाया। कलाकार और दर्शकों के बीच तालियों और गीतों का सिलसिला देर तक चलता रहा।
छत्तीसगढ़ी कलाकारों को मंच देने पर जताया आभार
पद्मश्री अनुज शर्मा ने चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में छत्तीसगढ़ी कलाकारों और लोककला को प्रमुखता से मंच देने के लिए मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद सहित जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह जैसे आयोजन प्रदेश की कला एवं संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने के साथ स्थानीय कलाकारों को भी बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करते हैं। समारोह के पहले दिन उनकी प्रस्तुति ने रायगढ़वासियों को छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत और संस्कृति से जोड़ते हुए यादगार माहौल बना दिया।




