कोरबा में स्वाइन फ्लू के 30 केस, मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में टीबी मरीजों का कब्जा

कोरबा, 24 सितम्बर। जिले में स्वाइन फ्लू का संक्रमण धीरे-धीरे पैर पसार रहा है। पिछले करीब एक माह में स्वाइन फ्लू के 30 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं पड़ोसी जिलों अंबिकापुर और जांजगीर-चांपा में स्क्रब टाइफस के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने संक्रामक बीमारियों से निपटने की चुनौती बढ़ गई है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संक्रमित मरीजों के उपचार और उन्हें अन्य मरीजों से अलग रखने के लिए की गई तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।
स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने आइसोलेशन वार्ड तैयार होने की बात कही थी, लेकिन अस्पताल की जमीनी स्थिति अलग है। कोरोना संक्रमण के दौरान शासन से मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में 20 बिस्तरों वाले आइसोलेशन वार्ड की स्वीकृति मिली थी। अस्पताल परिसर के पीछे बनाए गए इस वार्ड में आवश्यक चिकित्सकीय उपकरणों के साथ ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था भी की गई थी। कोरोना संक्रमण का दौर समाप्त होने के बाद इस आइसोलेशन वार्ड का उपयोग टीबी-चेस्ट विभाग के लिए किया जाने लगा।
वर्तमान में वार्ड के भूतल पर 10 बेड का रेस्पिरेटरी वार्ड और प्रथम तल पर 10 बेड का टीबी वार्ड संचालित है। सभी बेड वर्तमान में संबंधित मरीजों के उपचार में उपयोग हो रहे हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू या स्क्रब टाइफस जैसे संक्रामक रोग से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचते हैं तो उन्हें तत्काल अलग रखने के लिए आरक्षित बेड उपलब्ध कराने में अस्पताल प्रबंधन को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
चिकित्सकीय दृष्टि से संक्रामक रोगों से पीड़ित मरीजों को अन्य मरीजों के साथ रखना जोखिमपूर्ण माना जाता है। खासकर टीबी जैसे संक्रामक रोग के मरीजों के बीच किसी अन्य संक्रमण से पीड़ित मरीज को रखने पर क्रॉस-इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में संक्रामक बीमारियों के लिए अलग और पर्याप्त संख्या में आइसोलेशन बेड की व्यवस्था आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक मिले 30 स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों में से कुछ उपचार के लिए रायपुर के अस्पतालों तक पहुंचे, जबकि अधिकांश मरीजों ने निजी अस्पतालों में उपचार कराया। राहत की बात यह है कि अभी तक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज उपचार के लिए नहीं पहुंचा है। हालांकि, मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में सरकारी अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के संयुक्त संचालक एवं सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. गोपाल कंवर ने कहा कि स्वाइन फ्लू सहित अन्य संक्रामक बीमारियों के मरीजों के उपचार के लिए आइसोलेशन वार्ड उपलब्ध है। वर्तमान में जरूरत के अनुसार बेड का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मरीज अस्पताल पहुंचने पर तत्काल बेड उपलब्ध कराकर उपचार की व्यवस्था की जाएगी।




