समर स्पेशल ट्रेनों में कोरबा फिर उपेक्षित, बिलासपुर को मिला ज्यादा लाभ

कोरबा,27 अप्रैल 2026। औद्योगिक नगरी कोरबा में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ के बावजूद रेल सुविधाओं में अपेक्षित विस्तार नहीं हो पाया है। समर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा के बावजूद कोरबा को इस सुविधा का सीमित लाभ मिला है, जबकि अधिकांश ट्रेनें बिलासपुर से संचालित की जा रही हैं।

स्थिति यह है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने के लिए यात्रियों को करीब 100 किलोमीटर दूर बिलासपुर जाना पड़ रहा है। वहां भी कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल साबित हो रहा है। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रेल प्रशासन द्वारा एक दर्जन से अधिक समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, लेकिन कोरबा के हिस्से में केवल बेंगलुरु (यलहंका) के लिए एक समर स्पेशल ट्रेन आई है, वह भी सिर्फ एक फेरे के लिए। इस रूट पर पहले से ही यात्रियों का भारी दबाव रहता है, इसके बावजूद नियमित रूप से केवल द्वि-साप्ताहिक वैनगंगा सुपरफास्ट ट्रेन ही उपलब्ध है। यलहंका स्पेशल ट्रेन में भी कन्फर्म सीट मिलना मुश्किल है और यात्रियों को आरएसी टिकट से ही संतोष करना पड़ रहा है।

कोरबा एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां BALCO, NTPC, SECL, CSEB और Adani Group जैसे बड़े उपक्रम संचालित हैं। यहां देशभर से बड़ी संख्या में लोग कार्यरत हैं। अनुमान के अनुसार, शहर की लगभग 40 प्रतिशत आबादी अन्य राज्यों से है। ऐसे में छुट्टियों के दौरान यात्रियों की आवाजाही बढ़ जाती है, लेकिन ट्रेनों में लंबी वेटिंग के कारण उनकी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। मजबूरी में कई यात्रियों को सड़क मार्ग से महंगा और जोखिम भरा सफर करना पड़ रहा है।
कोरबा-यलहंका रूट शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। रेल संघर्ष समिति के संरक्षक रामकिशन अग्रवाल ने मांग की है कि इस समर स्पेशल ट्रेन को कम से कम तीन महीने तक साप्ताहिक रूप से चलाया जाए। उनका कहना है कि केवल एक फेरे से इस रूट की वास्तविक मांग का आकलन संभव नहीं है।
कोरबा से चलने वाली Chhattisgarh Express में दिल्ली और अमृतसर के लिए 28 मई तक कन्फर्म टिकट उपलब्ध नहीं है। वहीं Yeshvantpur Express में 14 जून तक सीटें फुल हैं। बिलासपुर से चलने वाली सारनाथ और बीकानेर एक्सप्रेस में भी जून तक कन्फर्म सीट मिलना मुश्किल है। हालांकि, लिंक एक्सप्रेस और शिवनाथ एक्सप्रेस जैसी कम दूरी की ट्रेनों में फिलहाल सीटें उपलब्ध हैं।
मुंबई और हावड़ा जैसे व्यस्त रूटों पर टिकट बुकिंग का हाल यह है कि आरक्षण खुलने के दो घंटे के भीतर ही कन्फर्म सीटें खत्म हो जाती हैं। सुबह 8 बजे से टिकट बुकिंग शुरू होते ही यात्रियों में होड़ मच जाती है। 10 बजे तक टिकट नहीं मिलने पर लंबी वेटिंग लिस्ट का सामना करना पड़ता है।




