Chhattisgarh

विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर विशेष: हृदय रोग और स्ट्रोक से उबरने में फिजियोथेरेपी बनी सहारा, कल मिलेगा निशुल्क परामर्श

जांजगीर-चांपा। हर वर्ष 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को फिजियोथेरेपी, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष की वैश्विक थीम हृदय रोग एवं स्ट्रोक (लकवा) की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास में फिजियोथेरेपी एवं शारीरिक गतिविधि की भूमिका पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित व्यायाम और समय पर उपचार से हृदय रोग एवं स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के साथ ही बीमारी के बाद मरीज को बेहतर और स्वतंत्र जीवन जीने में मदद मिल सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और वर्ल्ड फिजियोथेरेपी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार हृदय रोग दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्ट्रोक यानी लकवे के बाद मरीज के शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना और दैनिक गतिविधियों में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में फिजियोथेरेपी पुनर्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नियमित फिजियोथेरेपी से मांसपेशियों की ताकत, शरीर का संतुलन, चलने की क्षमता और दैनिक कार्यों को करने की क्षमता में सुधार लाने में मदद मिलती है। इससे मरीज की शारीरिक क्षमता के साथ उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

प्राइम एडवांस फिजियोथेरेपी एंड लेजर क्लीनिक के डायरेक्टर फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रतीक यादव (पीटी) ने बताया कि हृदय रोग या स्ट्रोक के बाद मरीज को अपनी इच्छा से अचानक व्यायाम शुरू नहीं करना चाहिए। चिकित्सकीय सलाह के बाद मरीज की स्थिति के अनुसार फिजियोथेरेपी और व्यायाम की शुरुआत करनी चाहिए। शुरुआती चरण में हल्के व्यायाम और सांस संबंधी अभ्यास कराए जाते हैं, जबकि बाद में मरीज की क्षमता के अनुसार बैठने, खड़े होने और चलने के अभ्यास को शामिल किया जाता है।

डॉ. यादव ने कहा कि फिजियोथेरेपी केवल बीमारी के बाद पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधि और सही व्यायाम के माध्यम से कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी दिनचर्या में नियमित शारीरिक गतिविधि को शामिल करें और प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलने का प्रयास करें। साथ ही संतुलित खानपान अपनाने और शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण या परेशानी को नजरअंदाज न करने की सलाह दी।

विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर लोगों को फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधि के प्रति जागरूक करने के साथ स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा। इस अवसर पर 8 सितंबर को निशुल्क परामर्श की सुविधा उपलब्ध रहेगी। विशेषज्ञों ने लोगों से इसका लाभ उठाने और हृदय रोग, स्ट्रोक तथा अन्य शारीरिक समस्याओं से बचाव एवं पुनर्वास के लिए समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।

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