नवागढ़ का सिद्ध श्री गणेश मंदिर कल्चुरी कालीन वैभव का साक्षी, देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु

बेमेतरा, 13 सितम्बर 2026। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का नवागढ़ नगर अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां स्थित सिद्ध श्री गणेश मंदिर आस्था के साथ-साथ प्राचीन स्थापत्य और इतिहास का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। वर्षभर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यता है कि मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना भगवान श्री गणेश अवश्य पूर्ण करते हैं। इसी आस्था के चलते नवागढ़ का यह प्राचीन गणेश मंदिर देश के प्रमुख सिद्ध गणेश मंदिरों में अपनी अलग पहचान रखता है।
इतिहासकार डॉ. बसुबंधु दीवान के शोध और उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार नवागढ़ का सिद्ध श्री गणेश मंदिर छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास, धार्मिक परंपरा और स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण प्रमाण है। उनके अनुसार कल्चुरी काल में नवागढ़ 85 ग्रामों वाले एक महत्वपूर्ण परगने के रूप में स्थापित था। उस समय यहां मिट्टी से निर्मित किले का अस्तित्व था, जिसके अवशेष आज भी क्षेत्र में देखे जा सकते हैं। नवागढ़ तत्कालीन क्षेत्रीय प्रशासन का प्रमुख केंद्र था और यहीं से दीवानी एवं फौजदारी व्यवस्था का संचालन किया जाता था।
नवागढ़ और आसपास का क्षेत्र प्राचीन समय में धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। क्षेत्र में माता महामाया का प्राचीन मंदिर, तालाब, बावलियां, बगीचे और विभिन्न मंदिरों के अवशेष आज भी उस दौर की समृद्ध सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था की कहानी बताते हैं। यही कारण है कि नवागढ़ को केवल धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में भी देखा जाता है।
छत्तीसगढ़ में कल्चुरी शासनकाल को इतिहास का महत्वपूर्ण और समृद्ध काल माना जाता है। इस दौरान शासन की राजधानी अलग-अलग समय में तुम्मान, रतनपुर, खल्लारी और रईपुर रही। डॉ. दीवान के अनुसार जब रतनपुर राजधानी थी, तब प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन वहीं से होता था। वहीं विशाल क्षेत्र में सैन्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए शिवनाथ नदी के दक्षिण में लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर मांडव या मारो में सैन्य छावनी स्थापित की गई थी। इससे तत्कालीन शासकों को दूर-दराज के क्षेत्रों तक सैन्य पहुंच बनाए रखने में सुविधा होती थी।

नवागढ़ में स्थित प्राचीन श्री खेड़ापति जी का मंदिर उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली की विशेषताओं को समेटे हुए है। इसकी अष्टकोणीय आकृति इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है। वर्तमान समय में आमजन इसे श्री गणेश मंदिर के नाम से जानते हैं। मंदिर के सामने स्थित प्राचीन शमी वृक्ष के कारण इसे श्री शमी गणेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
इतिहासकार डॉ. बसुबंधु दीवान के शोध के अनुसार मंदिर का निर्माण संभवत: संवत् 704 यानी करीब 647 ईस्वी में गोड़ राजाओं के समय कराया गया था। मंदिर के सामने स्थित शमी वृक्ष को लेकर भी स्थानीय स्तर पर प्राचीन मान्यता है कि यह उसी काल से आज तक विद्यमान है। इस प्राचीन वृक्ष का उल्लेख गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित ‘कल्याण’ पत्रिका में भी मिलने की बात कही जाती है। मंदिर परिसर में स्थित अष्टकोणीय कुआं भी अपने निर्माण और स्थापत्य की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इसे बारीकी से ईंटों से निर्मित किया गया है। परिसर में एक शिलालेख मिलने की जानकारी भी सामने आती है, जिसके प्राकृत लिपि में होने की संभावना बताई गई है।
समय के साथ इस प्राचीन मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार कराया गया। ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मराठा शासक बिम्बाजी भोंसले के आदेश पर मंदिर के कुछ हिस्सों का पुनर्निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराया गया था। छत्तीसगढ़ विजय के बाद नागपुर के मराठा शासक बिम्बाजी भोंसले ने नागपुर से ही अपने अधिकारियों और सेनापतियों के माध्यम से प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन किया था। इस दौर में भी नवागढ़ और आसपास के क्षेत्र का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व बना रहा।
छत्तीसगढ़ में गोंड और कल्चुरी शासकों के समय निर्मित मंदिरों में गणेश मंदिरों की संख्या अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। ऐसे में नवागढ़ का यह प्राचीन गणेश मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। ब्रिटिश शासनकाल में पुरातत्व और ऐतिहासिक स्थलों के अध्ययन से जुड़े अधिकारी जे.डी. ब्लंट ने भी इस मंदिर का सर्वे किया था। उनकी रिपोर्ट में मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख किए जाने की जानकारी मिलती है।

समय के साथ मंदिर की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए जीर्णोद्धार के प्रयास भी किए गए। छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से कुछ वर्ष पूर्व मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार कराया गया। इससे मंदिर की धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ उसके ऐतिहासिक स्वरूप को संरक्षित रखने में मदद मिली है।
आज नवागढ़ का सिद्ध श्री गणेश मंदिर श्रद्धा, इतिहास और स्थापत्य का अनूठा संगम बना हुआ है। मंदिर में विराजमान भगवान श्री गणेश की प्रतिमा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां दर्शन और पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भगवान गणेश उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। गणेश उत्सव और विशेष धार्मिक अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है।
नवागढ़ क्षेत्र में मौजूद प्राचीन मंदिर, मूर्तियां, शमी वृक्ष, कुएं और किले के अवशेष छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन स्थलों का व्यवस्थित पुरातात्विक अध्ययन और संरक्षण किया जाना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को नवागढ़ की प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विरासत से परिचित कराया जा सके। आस्था के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध सिद्ध श्री गणेश मंदिर आज भी नवागढ़ की पहचान और छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है।




