Chhattisgarh

डबरी ने कम की सिंचाई की चिंता, मछली पालन से जोशमनि के परिवार को मिली अतिरिक्त आय की उम्मीद

अंबिकापुर, 28 सितम्बर। सरगुजा जिले के बकिरमा गांव की श्रीमती जोशमनि एक्का के परिवार के लिए खेत में बनी आजीविका डबरी खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन रही है। ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 2 लाख 99 हजार रुपये की लागत से पति के नाम से निर्मित इस डबरी में अब बारिश का पानी सहेजा जा रहा है। इसी पानी का उपयोग खेती की सिंचाई के साथ मछली पालन के लिए भी किया जा रहा है।

अंबिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत बकिरमा में बनी इस डबरी से परिवार को बारिश के पानी को खेत में ही रोकने की सुविधा मिली है। पहले बरसात का पानी बहकर निकल जाता था, लेकिन अब उसे डबरी में संग्रहित किया जा रहा है। जरूरत के समय इस पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई में किया जा सकता है। इससे परिवार को खेती में सहूलियत मिलने के साथ भविष्य में खेती का दायरा बढ़ाने की उम्मीद भी है।

मछली पालन से अतिरिक्त आमदनी की तैयारी

डबरी बनने के बाद जोशमनि के परिवार ने इसमें मछली पालन भी शुरू किया है। परिवार का कहना है कि मछलियां तैयार होने के बाद घरेलू जरूरत पूरी करने के साथ उनका बाजार में विक्रय किया जाएगा। बिक्री से प्राप्त राशि को दोबारा मछली पालन में लगाकर इस गतिविधि को आगे बढ़ाने की योजना है।

परिवार के लिए यह पहला अवसर है, जब खेत में उपलब्ध जलस्रोत का उपयोग मछली पालन के लिए किया जा रहा है। खेती के साथ आय का नया माध्यम जुड़ने से परिवार में उत्साह है। बच्चों समेत परिवार के अन्य सदस्य भी मछली पालन में रुचि ले रहे हैं और डबरी की गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं।

जोशमनि ने बताया कि डबरी से एक ओर सिंचाई की समस्या कम हुई है, वहीं दूसरी ओर मछली पालन के जरिए अतिरिक्त आमदनी की संभावना बनी है। उन्होंने इस सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

सेवा संकल्प अभियान के तहत बकिरमा की यह कहानी बताती है कि जल संरक्षण के लिए बनाई गई छोटी संरचना ग्रामीण परिवार की आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डबरी में संरक्षित बारिश का पानी खेती के काम आ रहा है और उसी जलस्रोत से मछली पालन के जरिए परिवार आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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