छत्तीसगढ़ में पाठ्यपुस्तक वितरण को लेकर बढ़ा विवाद, अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ राज्य के अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने पाठ्यपुस्तकों के वितरण में हो रही देरी और अव्यवस्था को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
संघ के अध्यक्ष मनोज पाण्डेय और सचिव आलोक शुक्ला द्वारा जारी ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा पिछले कई वर्षों से शासकीय विद्यालयों को संकुल स्तर पर तथा अशासकीय विद्यालयों को जिला स्तर पर समय पर निशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाती रही हैं। इससे विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती थी और शैक्षणिक गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित होती थीं।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पाठ्य पुस्तक निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही, असंवेदनशीलता तथा हठधर्मिता के कारण विद्यालयों को समय पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गईं। कई विद्यालयों को सितंबर 2025 तक भी पुस्तकें नहीं मिलीं, जबकि कुछ विषयों की पुस्तकें पूरे सत्र में उपलब्ध नहीं हो सकीं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
संघ ने कहा कि पिछले वर्ष निगम ने पूर्व में चली आ रही वितरण व्यवस्था को बदलते हुए अशासकीय विद्यालयों को छह निर्धारित डिपो के माध्यम से पुस्तक वितरण किया, लेकिन वहां भी आधी-अधूरी पुस्तकें ही उपलब्ध कराई गईं। इस व्यवस्था के कारण स्कूल संचालकों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और शासन की भी आलोचना हुई।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुस्तकों में बारकोड आधारित स्कैनिंग व्यवस्था लागू किए जाने के बाद पुस्तकें प्राप्त होने के बावजूद उन्हें स्कैन करने में कई दिनों का समय लग गया, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ। संघ का कहना है कि इस समस्या को लेकर उन्होंने पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष एवं अधिकारियों से कई दौर की चर्चा की थी। बैठक में यह सहमति बनी थी कि सत्र 2026-27 से व्यवस्था में सुधार किया जाएगा और अशासकीय विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।
हालांकि संघ का आरोप है कि वर्तमान सत्र 2026-27 में भी हालात नहीं बदले हैं। शासकीय विद्यालयों को 15 जून तक केवल आंशिक पुस्तकें मिली हैं, जबकि अशासकीय विद्यालयों के लिए दूरस्थ डिपो के माध्यम से 21 जुलाई तक पुस्तक वितरण की व्यवस्था बनाई गई है। संघ का कहना है कि इसमें भी बदलाव की संभावना बनी हुई है, जिससे समय पर पुस्तकें मिलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
संघ ने चिंता जताई है कि नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू हो चुका है और इस वर्ष बोर्ड परीक्षाएं फरवरी में आयोजित होने की संभावना है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को अब तक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित होना स्वाभाविक है।
ज्ञापन में पाठ्य पुस्तक निगम के रवैये को विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा गया है कि यह न केवल निंदनीय बल्कि दंडनीय भी है। संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए तथा अशासकीय विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि विद्यार्थियों को हो रहे शैक्षणिक नुकसान को कम किया जा सके।
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो 25 जून को प्रदेश के सभी अशासकीय विद्यालयों में अध्यापन कार्य बंद कर जिला मुख्यालयों में कलेक्टर कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी यदि 5 जुलाई तक संकुल स्तर पर पुस्तक वितरण शुरू नहीं किया गया तो प्रदेशभर के अशासकीय विद्यालय संचालक, शिक्षक और विद्यार्थियों के अभिभावक राजधानी रायपुर में व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
संघ ने राज्य सरकार से विद्यार्थियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने और पाठ्यपुस्तक वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।





