Chhattisgarh

एनटीपीसी कोरबा में GEM 7.0 का शुभारंभ, 122 बालिकाओं को मिलेगा आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण

कोरबा, 19 मई 2026। एनटीपीसी कोरबा ने अपने प्रमुख सामुदायिक विकास कार्यक्रम बालिका सशक्तिकरण अभियान (GEM 7.0) के सातवें संस्करण का शुभारंभ किया। चार सप्ताह तक चलने वाले इस पूर्णतः आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से इस वर्ष 122 बालिकाओं को शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और आत्मनिर्भरता से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षण दिए जाएंगे।

कार्यक्रम का उद्घाटन एनटीपीसी कोरबा के परियोजना प्रमुख किशोर चंद्र पात्रा ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारी, मैत्री महिला समिति की सदस्याएं, सीआईएसएफ प्रतिनिधि, कर्मचारी, यूनियन एवं एसोसिएशन के पदाधिकारी, अभिभावक तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

एनटीपीसी लिमिटेड की नैगम सामाजिक दायित्व (CSR) पहल के अंतर्गत संचालित इस अभियान का उद्देश्य 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समग्र विकास के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के प्रति बढ़ते विश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष 122 बालिकाओं ने इसमें नामांकन कराया है।

कार्यक्रम की शुरुआत पंजीकरण एवं किट वितरण से हुई। श्री पात्रा ने प्रतिभागियों को GEM किट प्रदान कर उन्हें इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। वहीं मैत्री महिला समिति द्वारा भी विशेष किट वितरित किए गए, जिससे बालिकाओं में उत्साह देखने को मिला।

उद्घाटन समारोह में बालिकाओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। पूर्व प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि GEM कार्यक्रम ने उनके आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास और संवाद कौशल को नई पहचान दी।

अपने संबोधन में किशोर चंद्र पात्रा ने कहा कि GEM केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि बालिकाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाला मंच है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण से पूरा समाज मजबूत होता है।

चार सप्ताह के दौरान प्रतिभागियों को शैक्षणिक सुदृढ़ीकरण, कंप्यूटर शिक्षा, योग, खेलकूद, आत्मरक्षा, कला-संगीत, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, संचार कौशल, समय प्रबंधन और नेतृत्व विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

एनटीपीसी कोरबा द्वारा संचालित इस अभियान से अब तक करीब 660 बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। कार्यक्रम के माध्यम से 41 विद्यालयों तथा 36 गांवों एवं शहरी वार्डों की छात्राएं जुड़ चुकी हैं। इनमें से कई बालिकाएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने क्षेत्रों में प्रेरणास्रोत बन रही हैं।

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