Raipur AIIMS : बायपास सर्जरी के लिए 5 माह तक इंतजार, जांचों की लंबी वेटिंग से मरीज परेशान

रायपुर, 05, सितम्बर 2026। राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Raipur) में बेहतर और किफायती इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को कई जरूरी जांच और सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हार्ट की बायपास सर्जरी के लिए मरीजों को करीब चार से पांच महीने तक की वेटिंग का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट सीटी जैसी जरूरी जांचों के लिए भी कई सप्ताह तक इंतजार करना पड़ रहा है।
एम्स रायपुर में हार्ट की बायपास सर्जरी के लिए करीब चार माह की वेटिंग बताई जा रही है। इसके अलावा सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए भी डेढ़ से तीन माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। जांच और ऑपरेशन से पहले की प्रक्रिया लंबी होने के कारण मरीजों को अस्पताल में इलाज के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में बायपास सर्जरी के लिए करीब दो माह की वेटिंग है। हालांकि यहां सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों के लिए महज दो-तीन दिनों की वेटिंग बताई गई है। इसके चलते गंभीर बीमारी से जूझ रहे कुछ मरीजों को लंबी प्रक्रिया के कारण निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
एम्स में पेट सीटी स्कैन की सुविधा निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम शुल्क में उपलब्ध है। सरकारी अस्पतालों में यह जांच मुख्य रूप से एम्स में ही उपलब्ध होने के कारण यहां मरीजों की संख्या अधिक है। कैंसर मरीजों के लिए महत्वपूर्ण पेट सीटी स्कैन की जांच एम्स में करीब 7 हजार रुपए में होती है, जबकि निजी अस्पतालों में इसके लिए लगभग 22 से 25 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं। कम शुल्क के कारण इस जांच के लिए भी करीब 45 से 50 दिनों तक की वेटिंग बताई जा रही है।
आंबेडकर अस्पताल में सीटी स्कैन, एमआरआई और सोनोग्राफी के लिए वेटिंग कम होने का दावा किया जाता है। हालांकि मरीजों के अनुसार जांच कराने में दो-तीन दिन का समय लग जाता है। यहां सोनोग्राफी की सामान्य जांच के लिए करीब 100 रुपए शुल्क है और आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों के लिए यह सुविधा निशुल्क हो सकती है। इसके मुकाबले निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में सामान्य सोनोग्राफी के लिए करीब 800 से 1000 रुपए तथा विशेष सोनोग्राफी के लिए 2500 से 3000 रुपए तक खर्च करना पड़ सकता है।
एम्स में जांचों की लंबी वेटिंग का एक कारण मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या भी बताई जा रही है। बेहतर इलाज और विशेषज्ञ सेवाओं के लिए छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज रायपुर पहुंचते हैं। वहीं गंभीर मरीजों के लिए जांच और सर्जरी से पहले जरूरी प्रोटोकॉल पूरा करना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया के चलते सामान्य मरीजों को कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है।
मरीजों का आरोप है कि लंबी वेटिंग के कारण कई बार उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने लगती है। आर्थिक रूप से सक्षम मरीज ऐसे मामलों में निजी अस्पतालों में जाकर इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों में कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए लंबी वेटिंग बड़ी परेशानी बन रही है।
अस्पतालों में वीआईपी और पहुंच वाले मरीजों को जांच में प्राथमिकता मिलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में आम मरीजों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। आंबेडकर अस्पताल में भी रेडियोग्राफर और अन्य संसाधनों की कमी के कारण एमआरआई जैसी जांच 24 घंटे उपलब्ध नहीं हो पाती।
एम्स के पीआरओ डॉ. मृत्युंजय राठौर के अनुसार, एडवांस और गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए सभी विभागों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कुछ विशेष सर्जरी और जांचों के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी सेवाओं में तत्काल जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है तथा वेटिंग लिस्ट में पारदर्शिता बरती जा रही है।
वहीं एसीआई के प्रोफेसर एवं कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि संस्थान में जरूरी संसाधनों की कमी के कारण बायपास सर्जरी के लिए वेटिंग रहती है। एक ही ऑपरेशन थिएटर और सीमित स्किल्ड स्टाफ होने के कारण मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि बिहार, ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से मरीज एसीआई में इलाज कराने पहुंच रहे हैं।




