IGKV के जर्जर हॉस्टलों में छात्रों की सुरक्षा पर संकट, 30% विद्यार्थियों को नहीं मिल रही आवासीय सुविधा

रायपुर, 13 सितम्बर 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में विद्यार्थियों की सुरक्षा और हॉस्टल सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय परिसर के कई हॉस्टल 30 से 60 साल पुराने हो चुके हैं और लंबे समय से पर्याप्त रखरखाव नहीं होने के कारण उनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कई भवनों में प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। करीब दो महीने पहले शिवम, सत्यम और मंदाकिनी हॉस्टल में प्लास्टर व छज्जे गिरने की घटनाएं हुई थीं। इनमें एक छात्र के घायल होने की भी जानकारी सामने आई थी।
साल 1960 में निर्मित सत्यम हॉस्टल समेत कई पुराने भवन अब अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। जर्जर भवनों में रहने वाले विद्यार्थियों को हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। छात्रों का कहना है कि हॉस्टल में रहना उनकी जरूरत है, लेकिन भवनों की खराब स्थिति के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हॉस्टलों का निरीक्षण और जांच कराने की बात कही थी तथा मरम्मत कार्य कराने का दावा भी किया गया था। हालांकि विद्यार्थियों के अनुसार अभी भी कई स्थानों पर अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
पिछले महीने परीक्षाओं के बाद विद्यार्थियों की छुट्टियां थीं। यह अवधि हॉस्टलों में बड़े स्तर पर मरम्मत और रखरखाव कार्य पूरा करने के लिए उपयुक्त मानी जा रही थी, लेकिन छात्रों का कहना है कि इस दौरान भी सभी जरूरी काम पूरे नहीं हो सके। इससे विश्वविद्यालय की मरम्मत व्यवस्था और समयबद्ध कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विश्वविद्यालय में भवनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए नियमित व्यवस्था भी मौजूद है। इसके लिए दो इंजीनियर, दो लिपिक और एक केयरटेकर तैनात हैं। जरूरत के मुताबिक छोटे और मध्यम स्तर के मरम्मत कार्यों पर 50 लाख रुपये तक खर्च करने की व्यवस्था बताई गई है। इन कार्यों के लिए वित्तीय मंजूरी स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दी जाती है। इसके बावजूद जर्जर हॉस्टलों में समय पर मरम्मत नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

14 हॉस्टल, करीब 1400 सीटें और लगभग 2000 विद्यार्थी
IGKV में विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध हॉस्टल क्षमता के बीच भी बड़ा अंतर है। कृषि महाविद्यालय में यूजी स्तर पर करीब 600, पीजी में लगभग 800 और पीएचडी में करीब 600 सीटें हैं। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 2000 विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक व्यवस्था है। दूसरी ओर परिसर में विद्यार्थियों के रहने के लिए कुल 14 हॉस्टल हैं।
इनमें छह बालिका हॉस्टल में लगभग 650 सीटें और आठ बालक हॉस्टल में करीब 750 सीटें उपलब्ध हैं। यानी बालक और बालिका हॉस्टलों को मिलाकर लगभग 1400 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था है। इस हिसाब से करीब 600 विद्यार्थी यानी लगभग 30 प्रतिशत विद्यार्थी परिसर की हॉस्टल सुविधा से बाहर रह जाते हैं।
हॉस्टल नहीं मिलने वाले विद्यार्थियों को मजबूरी में रायपुर शहर में किराए के कमरों या पीजी में रहना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। कृषि शिक्षा के लिए दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।
छात्रों ने उठाई सुरक्षित हॉस्टल और क्षमता बढ़ाने की मांग
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जर्जर हॉस्टलों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय पुराने भवनों की तकनीकी जांच कराकर उनकी मजबूती का आकलन किया जाना चाहिए। जहां भवन सुरक्षित नहीं हैं, वहां आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण या नए हॉस्टल बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए।
छात्रों ने हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने की भी मांग की है, ताकि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को परिसर में ही सुरक्षित और किफायती आवास मिल सके। उनका कहना है कि सुरक्षित आवास विद्यार्थियों की मूलभूत जरूरत है और इसमें किसी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
कुलपति ने कहा- सुरक्षा को लेकर सभी हॉस्टलों की जांच कराई गई
IGKV के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने हॉस्टलों में प्लास्टर गिरने की घटनाओं को गंभीरता से लेने की बात कही है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी हॉस्टलों की जांच कराई जा चुकी है। जिन हॉस्टलों में शिकायतें मिली हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर तत्काल मरम्मत कार्य कराया जा रहा है।
अब विद्यार्थियों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। जर्जर हॉस्टलों की स्थायी मरम्मत के साथ ही हॉस्टल क्षमता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।




