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CISF ने आईआईटी कानपुर से किए दो एमओयू, साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने देश के महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर के साथ साइबर सुरक्षा तथा ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दो समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौता ज्ञापनों पर 15 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए गए। इस पहल से सीआईएसएफ की आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं कोयला खनन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा से संबंधित समझौते के तहत सीआईएसएफ कर्मियों को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक्स, साइबर घटना प्रतिक्रिया, आपदा प्रबंधन तथा उभरते साइबर खतरों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इससे साइबर हमलों और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी संभावित चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सुरक्षा बल के तकनीकी कौशल को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वहीं, ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन तकनीक से संबंधित समझौते के तहत यूएवी संचालन, ड्रोन फोरेंसिक्स और काउंटर-यूएएस तकनीक में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान, उन्नत सिमुलेटर और फोरेंसिक सुविधाओं के विकास तथा स्वदेशी तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।

कोयला खनन क्षेत्र के लिए यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोयला खदानों में बड़े भू-भाग, ओपनकास्ट माइनिंग क्षेत्र, कोयला स्टॉक, कन्वेयर सिस्टम, वर्कशॉप, विद्युत प्रतिष्ठान और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक परिसंपत्तियां होती हैं। ऐसे क्षेत्रों की सुरक्षा में ड्रोन तकनीक का उपयोग व्यापक निगरानी, संवेदनशील स्थानों की हवाई निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की त्वरित पहचान के लिए किया जा सकता है।

सीआईएसएफ प्रमुख ने इस पहल को सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के साथ ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक का समावेश वर्तमान सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप है। इन तकनीकों के प्रभावी उपयोग से विशाल खनन क्षेत्रों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

दोनों समझौता ज्ञापनों से सीआईएसएफ की साइबर सुरक्षा, ड्रोन आधारित निगरानी और उभरते तकनीकी खतरों से निपटने की परिचालन क्षमता मजबूत होने के साथ देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं कोयला खनन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से और सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

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