Chhattisgarh

CG NEWS: हाथियों के आतंक से 3 परिवार बेघर, 5 दिन बाद भी नहीं मिली मदद; खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर ग्रामीण

एमसीबी। एमसीबी जिले के जनकपुर पार्क परिक्षेत्र में हाथियों के दल का आतंक लगातार ग्रामीणों के लिए मुसीबत बना हुआ है। ग्राम थोड़गी के हथवारी पारा में हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाते हुए तीन ग्रामीणों के घरों को तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया। घर में रखा सामान और अनाज भी बर्बाद हो गया, जबकि खेतों में लगी फसल को भी हाथियों ने नुकसान पहुंचाया।

हाथियों के उत्पात के पांच दिन बाद भी प्रभावित तीन परिवारों के सामने सिर छिपाने का संकट बना हुआ है। कोई खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है तो कोई दूसरे ग्रामीणों के घर में शरण लिए हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक शासन-प्रशासन और वन विभाग की ओर से प्रभावित परिवारों की सुध तक लेने नहीं आया है।

यह पूरा मामला जनकपुर पार्क परिक्षेत्र के ग्राम थोड़गी के हथवारी पारा का है, जहां हाथियों के दल ने ग्रामीणों के तीन घरों को तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया। घरों के अंदर रखा सामान और अनाज भी हाथियों के उत्पात की भेंट चढ़ गया। इतना ही नहीं, खेतों में लगी फसल को भी हाथियों ने पूरी तरह नुकसान पहुंचाया।

हाथियों के इस आतंक ने तीन परिवारों को बेघर कर दिया है। अब इन ग्रामीणों के सामने अपने और अपने परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, और कुछ दूसरे ग्रामीणों के घरों में शरण लिए हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए अब तक किसी तरह की अस्थायी या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि तत्काल मदद के लिए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है और पंचायत स्तर से भी मदद नहीं मिलने की बात ग्रामीणों ने कही है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि घर के साथ अनाज और फसल का नुकसान होने से परिवार और बच्चों के साथ रहने में काफी परेशानी हो रही है। बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे रहने की मजबूरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग पर हाथियों से सुरक्षा दिलाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लगातार हाथियों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन ग्रामीणों को हाथियों की सही लोकेशन और समय पर पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में जान-माल का खतरा लगातार बना हुआ है।

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