कोरबा के DSPM प्लांट में कोयले का संकट, चार दिन का स्टॉक शेष; दिवाली से पहले बढ़ी चिंता

कोरबा,24 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत संयंत्र (डीएसपीएम प्लांट) में कोयले का स्टॉक क्रिटिकल स्टेज पर पहुंच गया है। संयंत्र की एक इकाई रखरखाव के लिए बंद होने से कोयले की खपत आधी हो गई है, इसके बावजूद प्लांट में महज चार दिन का कोयला स्टॉक शेष रह गया है। ऐसे में आगामी दिनों में कोयले की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना बिजली उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। खासकर दिवाली से पहले बिजली की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए संयंत्र में पर्याप्त कोयला भंडारण की जरूरत महसूस की जा रही है।
राज्य गठन के बाद वर्ष 2007 में स्थापित डीएसपीएम प्लांट में 250-250 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयों के माध्यम से बिजली उत्पादन शुरू हुआ था। करीब 19 वर्षों के परिचालन के दौरान संयंत्र ने विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्तमान में संयंत्र की एक नंबर इकाई को आवश्यक रखरखाव के लिए बंद किया गया है। इस इकाई को लगभग 16 दिन बाद लाइटअप किए जाने की योजना है। फिलहाल दो नंबर इकाई से बिजली उत्पादन जारी है।

संयंत्र की दोनों इकाइयां पूरी क्षमता से संचालित होने पर प्रतिदिन करीब 8,000 टन कोयले की खपत होती है। वहीं, एक इकाई के बंद रहने से दूसरी इकाई के संचालन के लिए प्रतिदिन लगभग 4,000 टन कोयले की आवश्यकता पड़ रही है। इस तरह कोयले की दैनिक खपत आधी हो गई है। इसके बावजूद स्टॉक का घटकर महज चार दिन के लिए पर्याप्त रह जाना चिंता का विषय है।
डीएसपीएम प्लांट को एसईसीएल की खदानों से रेल मार्ग के जरिए कोयले की आपूर्ति की जाती है। एसईसीएल की मानिकपुर, कुसमुंडा सहित अन्य खदानों से संयंत्र की जरूरतें पूरी की जाती हैं। ऐसे में कोयले के भंडार को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखने के लिए आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। यदि समय रहते पर्याप्त कोयला उपलब्ध नहीं कराया गया, तो भविष्य में संयंत्र के संचालन पर दबाव बढ़ सकता है।
इधर, दिवाली का त्योहार नजदीक आने के साथ ही प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। धनतेरस से शुरू होने वाले रोशनी के पर्व के दौरान घरों, प्रतिष्ठानों और बाजारों में झालर व अन्य विद्युत सजावट का इस्तेमाल बढ़ेगा। शुक्रवार शाम 7.15 बजे प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 6,135 मेगावाट दर्ज की गई। वर्तमान में मांग छह हजार मेगावाट के आसपास पहुंच रही है। त्योहार के दौरान मांग में और वृद्धि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन संयंत्रों की इकाइयों को अधिक क्षमता पर चलाना पड़ सकता है, जिससे कोयले की खपत भी बढ़ेगी। ऐसे में डीएसपीएम प्लांट सहित अन्य ताप विद्युत संयंत्रों में पर्याप्त कोयला स्टॉक बनाए रखना जरूरी है। आगामी दिनों में एसईसीएल से होने वाली आपूर्ति और कोयला भंडारण की स्थिति पर नजर रहेगी।




