Chhattisgarh

SECL गेवरा हाउस में भू-विस्थापितों और श्रमिकों का प्रदर्शन, चेयरमैन के आगमन पर उठाई हक-अधिकार की आवाज

कोरबा, 10 अक्टूबर 2026। एसईसीएल (SECL) के गेवरा हाउस में चेयरमैन के आगमन के दौरान भू-विस्थापितों, ड्राइवरों और मजदूरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना (गैर-राजनीतिक संगठन) के प्रदेश उपाध्यक्ष उमागोपाल के नेतृत्व में मुख्य गेट पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए प्रबंधन के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। प्रदर्शनकारियों ने भू-विस्थापितों को उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को रोजगार, ठेका श्रमिकों को समय पर वेतन तथा खदानों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शन के बाद प्रबंधन को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एसईसीएल के खदान क्षेत्रों में जमीन देने वाले प्रभावित परिवारों को बिना अनुचित कटौती के उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। साथ ही पुनर्वास के तहत प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें विस्थापन के बाद परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई।

कलिंगा कंपनी में कार्यरत ड्राइवरों और मजदूरों के वेतन भुगतान का मुद्दा भी प्रदर्शन के दौरान प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कर्मचारियों को प्रत्येक माह की 1 से 5 तारीख के बीच वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए, जिससे वे बैंक ऋण की किस्तों और घरेलू खर्चों का समय पर भुगतान कर सकें। इसके अलावा पीएनसी कंपनी में स्थानीय प्रभावित युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने तथा एसईसीएल के दीपका क्षेत्र में जय अंबे रोड लाइंस के कामगारों को नियमित ड्यूटी और समय पर वेतन उपलब्ध कराने की मांग की गई।

प्रदर्शन के दौरान दीपका, गेवरा और कुसमुंडा खदान क्षेत्रों में पिछले एक महीने के दौरान कथित तौर पर दो से तीन श्रमिकों की मौत की घटनाओं पर चिंता जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने खदानों और कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की। साथ ही ठेका श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ), दुर्घटना बीमा और स्वास्थ्य बीमा जैसी नियमानुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

उमागोपाल ने कहा कि भू-विस्थापितों और मजदूरों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को रोजगार तथा श्रमिकों को समय पर वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रबंधन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं होने पर संगठन प्रभावितों और श्रमिकों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करेगा। जरूरत पड़ने पर खदान बंदी जैसे कदम उठाने की भी चेतावनी दी गई।

प्रदर्शन में संगठन के अध्यक्ष महेंद्र कांत, कार्यकारिणी अध्यक्ष सुनील नायक, संगठन मंत्री प्रतीक राज और मुकेश यादव, सचिव गजाधर राठौर सहित प्रशांत राज, दया कश्यप, टीकाराम, जान सिंह, रामेश्वर पटेल, जोगेंद्र साहू, ध्रुव कुमार, ज्योति कंवर, अनिल सिंह सहित अन्य सेनानी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी और श्रमिकों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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