किसानों ने कलेक्ट्रेट में किया धरना-प्रदर्शन, धान बोनस समेत कई मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

जांजगीर चांपा। भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के बैनर तले प्रांत उपाध्यक्ष देव प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में किसानों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने वर्ष 2022-23 की लंबित करीब 1700 करोड़ रुपये की धान बोनस राशि का भुगतान करने और धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि का लाभ किसानों को देने की मांग की। इसके साथ ही कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 800 रुपये का प्रावधान करने की मांग भी रखी गई।
ज्ञापन में धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित करने तथा प्रति टोकन अधिकतम 40 क्विंटल अथवा 7500 किलो धान खरीदी की व्यवस्था करने की मांग की गई। किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया सरल करने, सभी खातेदारों के लिए पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त करने और टोकन व्यवस्था में सुधार की मांग भी उठाई गई। संघ ने बड़े किसानों को पांच, मध्यम किसानों को तीन और सीमांत किसानों को दो टोकन देने का सुझाव दिया।
किसानों ने फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने, लंबित सिंचाई परियोजनाओं में तेजी लाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और कृषि बिजली से जुड़ी समस्याओं का निराकरण करने की मांग की। विद्युत विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
इसके अलावा बिचौलियों की मनमानी पर रोक, भूमि अधिग्रहण में किसान हितों की रक्षा, बाजार में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई तथा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की मांग की गई।
भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी के दौरान किसानों से निर्धारित मात्रा के अनुरूप ही धान लेने की मांग करते हुए 40 किलो 700 ग्राम की सीमा संबंधी शासनादेश जारी करने की मांग भी उठाई। संघ ने कहा कि 13 अक्टूबर 2025 को कैबिनेट मंत्री गगन यादव द्वारा भारतीय किसान संघ के मंच से किसानों और प्रेस के समक्ष इस संबंध में घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक आदेश जारी नहीं हुआ है।
किसानों का कहना है कि बढ़ती कृषि लागत के बीच खेती को लाभकारी बनाए रखने के लिए उचित मूल्य, समय पर भुगतान, सिंचाई, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता जरूरी है।




