डबरी के गहरीकरण से बदली बाबूनाथ की खेती की तस्वीर, सब्जी उत्पादन और मछली पालन से बढ़ी आय

अम्बिकापुर, 08 अक्टूबर। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम ससकालो निवासी किसान बाबूनाथ के लिए डबरी का गहरीकरण और मरम्मत खेती-किसानी में बड़ा बदलाव लेकर आया है। पहले सिंचाई के लिए पानी की कमी से जूझने वाले बाबूनाथ अब डबरी में संग्रहित पानी का उपयोग साग-सब्जियों की खेती और मछली पालन में कर रहे हैं। इससे परिवार की जरूरतें पूरी होने के साथ खेती के खर्च में भी मदद मिल रही है।
ग्रामीण रोजगार योजना के तहत डबरी के गहरीकरण और मरम्मत से उसकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ी। अब बाबूनाथ इसी पानी से खेतों में नियमित रूप से साग-भाजी और अन्य सब्जियों की सिंचाई कर पा रहे हैं। घरेलू उपयोग के बाद बची सब्जियों को वे बाजार में बेचते हैं, जिससे होने वाली आमदनी खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने में सहायक बन रही है।
एक डबरी से सिंचाई और मछली पालन का लाभ
डबरी के गहरीकरण के बाद उसमें मछली बीज भी डाले गए हैं। इससे बाबूनाथ को खेती के साथ मछली पालन का अतिरिक्त आजीविका साधन मिला है। अब डबरी का पानी केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि मछली पालन के जरिए भी परिवार को आर्थिक लाभ का अवसर मिल रहा है।
बाबूनाथ बताते हैं कि पहले पानी की कमी के कारण सब्जी उत्पादन में परेशानी होती थी। डबरी में पर्याप्त पानी रहने से अब खेती करना आसान हो गया है। घर के लिए ताजी सब्जियां उपलब्ध होने के साथ अतिरिक्त उत्पादन की बिक्री से खेती का खर्च भी निकल रहा है।
जल संरक्षण बना आजीविका का आधार
बाबूनाथ ने डबरी के गहरीकरण से मिली सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि डबरी से उन्हें सिंचाई का भरोसेमंद साधन मिला है, जिससे खेती और मछली पालन दोनों का लाभ मिल रहा है।
बाबूनाथ की कहानी बताती है कि जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से जुड़े कार्य किसानों की आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डबरी का गहरीकरण उनके लिए केवल पानी संग्रहण का साधन नहीं, बल्कि सब्जी उत्पादन, मछली पालन और परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन गया है।




