KORBA:आदिवासी विकास विभाग में 20 लाख की बेडशीट खरीदी सवालों के घेरे में

कोरबा,01 अक्टूबर 2026। आदिवासी विकास विभाग में छात्रावासों और आश्रमों के लिए प्रस्तावित करीब 20 लाख रुपये की बेडशीट खरीदी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विभाग द्वारा 4,100 बेडशीट की खरीदी के लिए GeM के माध्यम से Limited Tender प्रक्रिया अपनाई गई है। इस खरीदी की अनुमानित लागत 19 लाख 96 हजार 700 रुपये निर्धारित की गई है। विभागीय अनुमान के अनुसार एक बेडशीट की कीमत करीब 487 रुपये बैठती है। हालांकि वास्तविक खरीद दर Financial Bid खुलने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले में सबसे प्रमुख सवाल Limited Tender अपनाए जाने को लेकर है। GeM पर Limited Tender का कारण तत्काल आवश्यकता बताया गया है। वहीं Bid जारी होने से लेकर अंतिम तिथि तक करीब 30 दिन का समय दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि बेडशीट की आवश्यकता इतनी तत्काल थी तो खरीद प्रक्रिया के लिए लगभग एक माह का समय क्यों निर्धारित किया गया। सामान्य तौर पर व्यापक प्रतिस्पर्धा से अधिक संख्या में योग्य आपूर्तिकर्ताओं को शामिल होने का अवसर मिलता है और प्रतिस्पर्धी दर प्राप्त होने की संभावना रहती है। ऐसे में Limited Tender की आवश्यकता और उसके औचित्य को लेकर विभाग से स्पष्टीकरण अपेक्षित है।
दस्तावेजों के अनुसार टेंडर का ATC यानी Additional Terms & Conditions अपर कलेक्टर सह अध्यक्ष की स्वीकृति से संबंधित है। ATC के अंतिम पृष्ठ पर अनुमोदन का उल्लेख है तथा सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग, कोरबा के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं। हालांकि ATC में Limited Tender को लेकर स्पष्ट स्वीकृति का उल्लेख दिखाई नहीं देता। दूसरी ओर GeM Bid Details में Limited Tender विकल्प को ‘Yes’ दर्शाया गया है और तत्काल आवश्यकता को इसका आधार बताया गया है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि Limited Tender अपनाने का निर्णय किस सक्षम अधिकारी अथवा समिति ने लिया और इसकी लिखित स्वीकृति किस दस्तावेज में दर्ज है।
विभागीय सूत्रों ने खरीदी प्रक्रिया में एक लिपिक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार अमन राम के पास DMF तथा खरीदी से संबंधित कार्यों का प्रभार बताया जाता है और उनकी भूमिका प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रही। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि Limited Tender का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और संबंधित नोटशीट अथवा स्वीकृति क्या है।
इसी तरह आयुष अग्रवाल और उनसे जुड़े लोगों अथवा फर्मों के नाम को लेकर भी विभागीय स्तर पर चर्चाएं होने की बात सामने आई है। हालांकि वर्तमान बेडशीट टेंडर में किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचने का कोई निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। Technical Evaluation और Financial Bid की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस फर्म को काम मिलता है और किस दर पर खरीदी होती है।
टेंडर 25 अगस्त 2026 को जारी किया गया था और इसकी अंतिम तिथि 24 सितंबर 2026 निर्धारित थी। निर्धारित समय पर 24 सितंबर को Technical Bid खोली गई। फिलहाल अंतिम Technical Evaluation और Financial Bid का परिणाम सामने नहीं आया है। Technical Evaluation में लगने वाला समय अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन जब खरीदी के लिए तत्काल आवश्यकता का आधार बताते हुए Limited Tender अपनाया गया हो, तब पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसके अलावा 19.96 लाख रुपये की अनुमानित लागत पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग ने 4,100 बेडशीट के लिए करीब 487 रुपये प्रति बेडशीट का अनुमान लगाया है। ऐसे में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इस दर का निर्धारण किस आधार पर किया गया। क्या इसके लिए Market Survey कराया गया, पुराने सरकारी खरीद रिकॉर्ड की दरों से तुलना की गई या कोई Rate Analysis तैयार किया गया। इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से अनुमानित दर के आधार को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किसी विशेष सप्लायर को लाभ पहुंचाने अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। हालांकि 4,100 बेडशीट की करीब 20 लाख रुपये की इस खरीद में Limited Tender की आवश्यकता, सक्षम स्वीकृति, तत्काल खरीद का आधार, अनुमानित दर तय करने की प्रक्रिया और Technical Evaluation जैसे बिंदुओं पर विभाग का स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है। Financial Bid खुलने और अंतिम खरीद आदेश जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी खजाने पर वास्तविक वित्तीय भार कितना पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा तथा पारदर्शिता के निर्धारित मानकों का कितना पालन हुआ।




