कचरे को बनाया उपयोगी संसाधन, एनआईबीएसएम विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल

रायपुर, 30 सितम्बर । कचरे को बनाया उपयोगी संसाधन, एनआईबीएसएम विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल- ‘स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत – विकसित भारत’ अभियान के तहत भाकृअनुप-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर में विद्यार्थियों ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विषय पर विभिन्न मॉडल और नवाचार प्रस्तुत किए।
बीएससी कृषि के विद्यार्थियों ने अपशिष्ट पदार्थों को उपयोगी उत्पादों और संसाधनों में बदलने से जुड़े नवीन, व्यावहारिक और पर्यावरण-अनुकूल विचारों का प्रदर्शन किया।
विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत मॉडलों में कचरा पृथक्करण, पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और अपशिष्ट के मूल्य संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रदर्शित किया गया। इनमें घरेलू कचरे, कृषि अवशेषों और जैव-अवक्रमणीय अपशिष्ट के उपयोग से जुड़े रचनात्मक और उपयोगी समाधान शामिल रहे। विद्यार्थियों ने बताया कि वैज्ञानिक सोच, उपयुक्त तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से कचरे को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता और उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन का उद्देश्य केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और उनके सतत उपयोग पर भी ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा कचरे को केवल त्याज्य पदार्थ के रूप में देखने के बजाय उसे संभावित संसाधन के रूप में देखने की प्रेरणा देती है। युवा विद्यार्थियों की ओर से विकसित नवाचारपूर्ण विचार सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। डॉ. राय ने विद्यार्थियों को अपने विचारों को व्यावहारिक, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप और व्यापक स्तर पर अपनाए जा सकने वाले समाधानों के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक और रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ सतत जीवनशैली और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिला। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि स्वच्छ और विकसित भारत के निर्माण में व्यक्तिगत सहभागिता, नवाचार और सामुदायिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. के. के. मंडल और डॉ. डेज़ी बसंदराय, संयुक्त निदेशक तथा डॉ. एस. के. शर्मा और डॉ. के. सी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत मॉडलों का अवलोकन किया और उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. श्रावणी सन्याल ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों के मॉडल प्रदर्शन और प्रस्तुतियों को सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया।




