मुड़ापार-शारदा विहार बाईपास में ‘नो एंट्री’ बेअसर, भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ा हादसे का खतरा

कोरबा, 30 सितम्बर। शहर के मुड़ापार-शारदा विहार बाईपास मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध के बावजूद उनकी आवाजाही जारी रहने से सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सड़क पर भारी वाहनों के लिए ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा होने के बावजूद कई बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते दिखाई देते हैं। इससे यातायात व्यवस्था के साथ-साथ आम नागरिकों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
इस मार्ग पर सुबह के समय स्थिति अधिक चिंताजनक हो जाती है। बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही और तेज रफ्तार यातायात के बीच बच्चों को सड़क पार करने तथा सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से कभी भी गंभीर सड़क हादसा हो सकता है।
मुड़ापार-शारदा विहार बाईपास शहर के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है और यहां दिनभर छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद ‘नो एंट्री’ व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना यातायात प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूर्व में भी इस क्षेत्र में सड़क हादसों की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले से ही आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने चाहिए
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिबंधित समय में भारी वाहन इस मार्ग पर किस प्रकार प्रवेश कर रहे हैं। यदि किसी मार्ग पर भारी वाहनों के लिए प्रवेश निषिद्ध है, तो उसका पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभाग और यातायात पुलिस की जिम्मेदारी है। नियमित जांच, बैरिकेडिंग और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई से ही व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से मुड़ापार-शारदा विहार बाईपास पर ‘नो एंट्री’ व्यवस्था को सख्ती से लागू करने, भारी वाहनों की नियमित जांच करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि बच्चों और आम राहगीरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। समय रहते यातायात व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो किसी गंभीर हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।




