Chhattisgarh

गेवराबस्ती भूमि अधिग्रहण में रिकॉर्ड की त्रुटियां बनीं बाधा, 2913 प्रभावितों को मिलेगा 299.29 करोड़ मुआवजा

कोरबा, 29 सितंबर 2026। एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र की खदान विस्तार परियोजना के लिए प्रस्तावित गेवराबस्ती भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 13 साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। करीब 20 प्रतिशत खातेदारों के भू-राजस्व रिकॉर्ड में मिली विभिन्न त्रुटियों के कारण अधिग्रहण की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। गेवराबस्ती के 2913 प्रभावितों को करीब 299.29 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाना है। जमीन के रिकॉर्ड में सुधार के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में एसईसीएल ने गेवराबस्ती के अधिग्रहण का निर्णय लिया था। इसके बाद फरवरी 2015 में इंदिरा स्टेडियम, आदर्श नगर कुसमुंडा में जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसके बाद गेवराबस्ती की 1243.557 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई। लंबा समय बीतने के बावजूद अब तक अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। पिछले वर्ष एसईसीएल कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय से राजस्व पत्रक को मंजूरी के लिए कंपनी मुख्यालय भेजा गया था। इससे प्रभावित परिवारों में अधिग्रहण, मुआवजा और रोजगार की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद जगी थी।

हालांकि, राजस्व पत्रक की जांच के दौरान कई खातेदारों के जमीन रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। इनमें जमीन का रकबा कम या अधिक दर्ज होना, निजी भूमि को सरकारी भूमि के रूप में दर्ज किया जाना सहित करीब 12 प्रकार की त्रुटियां बताई गई हैं। इन त्रुटियों के सुधार में लगभग दो महीने का समय लगने की संभावना है। इसके कारण गेवराबस्ती के प्रभावितों को राजस्व पत्रक की मंजूरी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

गेवराबस्ती भूमि अधिग्रहण में हो रही देरी का मुद्दा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी उठाया है। वार्ड क्रमांक 28 के पार्षद एवं नगर पालिका की लोक निर्माण समिति के पीआईसी सदस्य श्रवण कुमार यादव, वार्ड 26 के पार्षद देवेन्द्र दिवाकर, वार्ड 27 के पार्षद इन्द्रजीत बिंझवार और वार्ड 24 के पार्षद राजकुमार कंवर ने इस मामले को एसईसीएल के समक्ष रखा। बैठक में एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन ने खातेदारों के भूमि रिकॉर्ड में मिली त्रुटियों की जानकारी दी तथा दीपका तहसील के माध्यम से संबंधित खातेदारों को सूचना जारी करने और रिकॉर्ड सुधार में आवश्यक सहयोग का भरोसा दिलाया।

एसईसीएल ने गेवराबस्ती की परिसंपत्तियों का ड्रोन सर्वे भी कराया है और उसका डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध है। प्रभावितों को परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के समय निर्धारित प्रचलित दर के आधार पर मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। भूमि रिकॉर्ड में सुधार होने के बाद एसईसीएल कुसमुंडा महाप्रबंधक ने करीब डेढ़ माह के भीतर मुआवजा संबंधी प्रक्रिया पूरी कर सक्षम स्तर से अनुमोदन के लिए भेजने का आश्वासन दिया है। जनप्रतिनिधियों ने गेवराबस्ती बायपास सड़क की खराब स्थिति का मुद्दा भी उठाते हुए इसकी मरम्मत कराने की मांग की है।

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