महास्नान के बाद ‘अस्वस्थ’ महाप्रभु जगन्नाथ को लगाया जा रहा आमरस और जामुन के काढ़े का भोग, दादरखुर्द की 125 वर्ष पुरानी रथयात्रा 16 जुलाई को

कोरबा। आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष द्वितीया पर आयोजित होने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर जिले के विभिन्न गांवों में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर से लगे ग्राम दादरखुर्द की रथयात्रा जिले की सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध रथयात्राओं में गिनी जाती है। यहां पिछले 125 वर्षों से भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथयात्रा परंपरागत श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा पर महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी परंपरा के तहत मंदिर के पट फिलहाल बंद हैं और भगवान को इन दिनों आमरस तथा जामुन के काढ़े का भोग अर्पित किया जा रहा है। साथ ही उड़द की खिचड़ी का प्रसाद भी चढ़ाया जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन भजन-कीर्तन का आयोजन हो रहा है और श्रद्धालु भगवान के स्वस्थ होने तथा मंदिर के पट खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि 16 जुलाई को ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के पट खोले जाएंगे। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं को भव्य रथ पर विराजमान कर पूरे गांव में नगर भ्रमण कराया जाएगा। रथयात्रा में जिलेभर से हजारों श्रद्धालु शामिल होकर रथ खींचने का पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। इस अवसर पर गांव में विशाल मेले का भी आयोजन होता है।
ग्रामीणों के अनुसार दादरखुर्द में रथयात्रा की शुरुआत थवाईत परिवार ने की थी। परिवार के सदस्य वर्षों पहले जगन्नाथपुरी की यात्रा से लौटे तो वहां की परंपरा से प्रेरित होकर गांव में भी रथयात्रा शुरू की। तभी से यह धार्मिक परंपरा लगातार निभाई जा रही है और आज यह जिले की ऐतिहासिक रथयात्राओं में शामिल हो चुकी है।
ग्राम दादर विकास समिति के सचिव कृष्णा द्विवेदी ने बताया कि आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, रथयात्रा के दिन ड्राई डे घोषित करने तथा गांव तक सिटी बस सेवा संचालित करने की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि निजी वाहनों के कारण पार्किंग की समस्या उत्पन्न होती है, जबकि बस सेवा शुरू होने से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और यातायात व्यवस्था भी सुचारु रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि दादरखुर्द की 125 वर्ष पुरानी रथयात्रा जिले की ऐतिहासिक धरोहर है, इसलिए प्रशासन को इसे जिला महोत्सव का स्वरूप देने पर विचार करना चाहिए। इससे इस धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक पहचान मिलेगी।




