Chhattisgarh

सरस्वती शिशु मंदिर नैला-जांजगीर में धूमधाम से मनाया गया शाला प्रवेश उत्सव, हरि लीला ट्रस्ट ने भेंट किए वाद्य यंत्र और नवप्रवेशी विद्यार्थियों को दिए उपहार

जांजगीर-चांपा। सरस्वती शिशु मंदिर, नैला-जांजगीर में बुधवार को शाला प्रवेश उत्सव हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं हरि लीला ट्रस्ट के ट्रस्टी तथा भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अमर सुल्तानिया ने विद्यार्थियों को जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, अच्छे संस्कार अपनाने और निरंतर मेहनत करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “बड़ा बनने के लिए बड़े स्कूल नहीं, बल्कि बड़े संस्कार और बड़ा लक्ष्य जरूरी है।”

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हरि लीला ट्रस्ट, बनारी की ओर से विद्यालय को संगीत गतिविधियों के लिए वाद्य यंत्र भेंट करना रहा। ट्रस्ट ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को उपहार भी वितरित किए, जिससे बच्चों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। इस पहल की अभिभावकों, शिक्षकों और उपस्थित अतिथियों ने सराहना की।

मुख्य अतिथि अमर सुल्तानिया ने अपने संबोधन में कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर केवल शिक्षा देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और भारतीय संस्कारों का विकास भी करती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को महापुरुषों के संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए और अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने संस्कारों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाए, उसे वास्तविक सम्मान उसके संस्कार ही दिलाते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए नियमित खेल गतिविधियों में भाग लेने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर ही सफलता की मजबूत आधारशिला है। जब कोई विद्यार्थी डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी या किसी अन्य क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करता है, तो वह अपने माता-पिता, शिक्षकों, विद्यालय और पूरे जिले का नाम रोशन करता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मनोज पाण्डेय ने शिक्षा के साथ नैतिकता, अनुशासन और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सफलता किसी स्कूल या माध्यम की नहीं, बल्कि विद्यार्थी की मेहनत, लगन और समर्पण की पहचान होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ अच्छे संस्कारों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

शाला प्रवेश उत्सव के दौरान विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा। नवप्रवेशी विद्यार्थियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया, जिससे बच्चों और उनके अभिभावकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

इस अवसर पर संतोष उपाध्याय, कैलाश बसाईवाल, रविंद्र शराफ, प्रकाश शर्मा, गोविंद राम सोनी, श्रीमती बबीता वर्मा, भगवान दास वैष्णव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों, विद्यालय परिवार और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही।

शाला प्रवेश उत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभावना का संदेश दिया गया। वहीं हरि लीला ट्रस्ट द्वारा संगीत गतिविधियों के लिए वाद्य यंत्र एवं नवप्रवेशी विद्यार्थियों को उपहार प्रदान किए जाने की पहल को शिक्षा और प्रतिभा विकास की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना गया।

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